4. सुधारक और उनकी नियति - Page 51

36 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

(7) रूई से भरी हुई रजाइयां (तुलिका),

(8) तोशक, जिनमें शेर, बाघ आदि की आकृतियों की कढ़ाई की गई हो

(विकाटिका),

(9) दोनों तरफ पशु लोम लगे हुए गलीचे (उद्दालोम),

(10) एक तरफ पशु लोक लगे हुए गलीचे (इकांतलोमी),

(11) रत्नजडि़त शैयावरण (कथ्थीसम),

(12) रेशमी शैयावरण (कोसीयम),

(13) सोलह नर्तकियों के लिए पर्याप्त कालीनें (कट्टाकम),

(14-16) हाथी, घोड़े और रथ के नमदे,

(17) हिरन की खालों को सिलकर बनाए गए नमदे (अगीनापवेनी),

(18) जंगली हिरन की खालों से निर्मित नमदे,

(19) कालीन जिनके ऊपर चांदनी हों (सौटारखदाम), और

(20) पीठिकाएं, जिनमें सिर और पैरों के लिए लाल तकिए हों।’

परिव्राजक गौतम ऐसी वस्तुओं के उपयोग से दूर रहते हैं।

  1. अथवा वह कह सकता हैः ‘जब कि निष्ठावान व्यक्तियों द्वारा दिए जाने वाले भोजन पर निर्वाह करने वाले कुछ परिव्राजक और ब्राह्मण सजने-संवरने और सौंदर्य के साधनों का उपयोग करने के अभ्यस्त हो जाते हैं, जैसेः

अपने शरीर पर सुगंधित चूर्ण मलना, उससे बाल धोना और स्नान करना, पहलवानों की तरह अंगों को गदाओं से थपथपाना, दर्पणों, आंखों का काजल आदि, पुष्पहारों, कुंकुम, सौंदर्य प्रसाधनों, कंगन, कंठहारों, छडि़यों, औषधियों के लिए सरकंडे के खोलों, कटारों, सायबान कशीदाकारी की हुई चप्पलों, पगडि़यों, पुष्प, किरीटों, याक की पूंछ की चंवरों और लंबी झालरदार पोशाकों का इस्तेमाल करना।

परिव्राजक गौतम शरीर को सज्जित करने, सजने-संवरने के साधनों के उपयोग से दूर रहते हैं।’

  1. अथवा वह कह सकता हैः ‘जब कि निष्ठावान व्यक्तियों द्वारा दिए जाने वाले भोजन पर निर्वाह करने वाले कुछ परिव्राजक और ब्राह्मण इस तरह के क्षुद्र वार्तालाप के अभ्यस्त हो जाते हैं, जैसेः

राजाओं, डाकुओं, राज्य के मंत्रियों के किस्से, युद्ध, आतंक और लड़ाइयों के

वृतांत, खाद्य और पेय पदार्थों, वस्त्र, बिस्तरों, फूलमालाओं, इत्रों के बारे में बातें करना,

संबंध-संपर्कों, साज-सामान, गांवों-नगरों, शहरों और देशों के बारे में बातें करना, स्त्रियों

और सूरमाओं की कहानियां सुनाना, गली के नुक्कड़ों अथवा पनघट की गपशप करना,