4. सुधारक और उनकी नियति - Page 52

सुधारक और उनकी नियति

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भूतों की कहानियां सुनाना, बेढंगी बातें करना, पृथ्वी अथवा समुद्र के उद्भव के बारे

में अथवा अस्तित्व और अनस्तित्व के बारे में अटकलबाजी करना।

‘परिव्राजक गौतम ऐसे क्षुद्र वार्तालाप से अलग रहते हैं।’

  1. अथवा वह कह सकता हैः ‘जब कि निष्ठावान व्यक्ति द्वारा दिए गए भोजन पर निर्वाह करने वाले कुछ परिव्राजक और ब्राह्मण ऐसी विवादपूर्ण शब्दावली के प्रयोग के अभ्यस्त हो जाते हैं, जैसेः

तुम इस सिद्धांत और अनुशासन को नहीं जानते, मैं जानता हूं।

तुम इस सिद्धांत और अनुशासन को कैसे जान पाओगे?

तुम गलत विचारों में फंस गए हो। मैं ही केवल सही हूं।

मैं सही बात बोल रहा हूं, तुम नहीं।

तुम पहले को बाद में रख रहे हो और जो बाद में रखना चाहिए, वह पहले रख रहे हो।

तुमने उपाय निकालने में इतनी देर कर दी, इससे सब-कुछ गड़बड़ हो गया है।

तुम्हारी चुनौती स्वीकार कर ली गई है।

तुम गलत साबित हुए हो।

अपने विचारों को स्पष्ट बताओ।

अगर कर सकते हो, तो अपने आपको मुक्त करो।

‘परिव्राजक गौतम ऐसी विवादपूर्ण शब्दावली से अलग रहते हैं।’

  1. अथवा वह कह सकता हैः ‘जब कि निष्ठावान व्यक्तियों द्वारा दिए गए भोजन पर निर्वाह करने वाले कुछ परिव्राजक और ब्राह्मण संदेश ले जाने, दौत्य कार्य करने और राजाओं, राज्य के मंत्रियों, क्षत्रियों, ब्राह्मणों अथवा युवा मनुष्यों के बीच यह कहते हुए मध्यस्थता करने के अभ्यस्त हो जाते हैंः वहां जाओ, यहां आओ, यह अपने साथ ले जाओ, वहां से वे ले आओ।

‘परिव्राजक गौतम ऐसे दासोचित कार्यों से अलग रहते हैं।’

  1. अथवा वह कह सकता हैः ‘जब कि निष्ठावान व्यक्तियों द्वारा दिए गए भोजन पर निर्वाह करने वाले कुछ परिव्राजक और ब्राह्मण जो अपने लाभ की लालसा से प्रवंचक, प्रमादी (देने वालों के लिए पवित्र शब्दों का प्रयोग करने वाले) शगुनिया, ओझा का काम करते हैं।

‘परिव्राजक गौतम इस प्रकार की ठगी और गूढ़ भाषा से दूर रहते हैं।’

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(मज्झिम शील (आचरण पर लंबा अनुच्छेद) यहां पर समाप्त होता है)

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