4. सुधारक और उनकी नियति - Page 53

38 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

  1. अथवा वह कह सकता हैः ‘जब कि निष्ठावान व्यक्तियों द्वारा दिए गए भोजन पर निर्वाह करने वाले कुछ परिव्राजक और ब्राह्मण अपनी आजीविका कमाने के गलत साधन अपनाते हैं और निम्न स्तर की कलाएं दिखाते हैं, जैसेः

(1) हस्तरेखा विज्ञानµएक बच्चे के हाथी, पैरों आदि के निशानों से दीर्घ जीवन,

समृद्धि आदि (अथवा उसके विपरीत) की भविष्यवाणी करना, (2) शकुनों अथवा लक्षणों से भविष्यवाणी करना,

(3) बिजली की कड़क और खगोलीय स्थितियां देखकर शकुन-अपशकुन

बताना,

(4) स्वप्नों की व्याख्या कर भविष्यवाणी करना,

(5) शरीर के निशानों के आधार पर भविष्यवाणी करना,

(6) चूहों के कुतरे हुए कपड़ों के निशानों के आधार पर शकुन-अपशकुन

बताना,

(7) अग्नि को बलि चढ़ाना,

(8) चम्मच से चढ़ावा चढ़ाना,

(9 - 13) देवताओं को भूसी_ भूसी और अनाज का आटा, उबालने योग्य भूसी निकाला

हुआ अनाज, घी और तेल की भेंट चढ़ाना,

(14) सरसों मुंह से उगलकर अग्नि में डालना,

(15) देवताओं के लिए भेंट स्वरूप दाहिने घुटने से खून निकालना, (16) अंगुलियों की गांठे आदि देखकर मंत्र गुनगुनाने के बाद यह बताना कि

अमुक आदमी जन्म से भाग्यशाली है अथवा नहीं,

(17) यह बताना कि जिस स्थान पर मकान अथवा क्रीड़ा-स्थल बनना है, वह

शुभ है अथवा नहीं,

(18) रीति-रिवाजों के नियमों के बारे में सलाह देना,

(19) दुष्ट आत्माओं को समाधि-क्षेत्र में गिरा देना,

(20) भूतों को भगाना,

(21) मिट्टी के घर में निवास करते समय तंत्र-मंत्र का प्रयोग करना, (22) सांपों के तंत्र-मंत्र बोलना,

(23) जहर की तंत्र विद्या दिखाना,

(24) बिच्छू की तंत्र विद्या दिखाना,

(25) चुहिया की तंत्र विद्या दिखाना,

(26) पक्षी की तंत्र विद्या दिखाना,