सुधारक और उनकी नियति
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(27) कौए की तंत्र विद्या दिखाना,
(28) यह भविष्यवाणी करना कि आदमी कितने वर्ष और जीयेगा,
(29) मुसीबत से बचने के लिए तंत्र-मंत्र देना, और
(30) जानवरों को नियंत्रण में रखना।
‘परिव्राजक गौतम ऐसी तुच्छ कलाओं से दूर रहते हैं।’
- अथवा वह कह सकता हैः ‘जब कि निष्ठावान व्यक्तियों द्वारा दिए जाने वाले भोजन पर निर्वाह करने वाले कुछ परिव्राजक और ब्राह्मण क्षुद्र स्तर की कलाएं दिखाकर अपनी आजीविका कमाने के लिए गलत साधन अपनाते थे। निम्नलिखित चीजों और प्राणियों में अच्छे और बुरे गुण बताते थे तथा उनके निशान देखकर उसके मालिक को शुभ या अशुभ बताते थे, जैसेः
रत्न, तख्ता, पोशाक, तलवारें, बाण, धनुष, अन्य शस्त्र, पुरुष, स्त्रियां, लड़कियां,
दास, दासियां, हाथी, घोड़े, भैंसें, सांड, बैल, बकरियां, भेड़, मुर्गा, मुर्गी, बटर,
गोह, हिलसा, कछुए और अन्य प्राणी।
‘परिव्राजक गौतम ऐसी क्षुद्र कलाओं से दूर रहते हैं।’
- अथवा वह कह सकता हैः ‘जब कि निष्ठावान व्यक्तियों द्वारा दिए जाने वाले भोजन पर निर्वाह करने वाले कुछ परिव्राजक और ब्राह्मण निम्न स्तर की कलाओं द्वारा अपनी आजीविका कमाने के लिए अनुचित साधन अपनाते हैं, जैसे कि इस प्रकार की भविष्यवाणी करनाः
प्रमुख महोदय कूच करेंगे, गृह-प्रमुख आक्रमण करेंगे और शत्रु पीछे हट जाएंगे,
शत्रुओं के प्रमुख आक्रमण करेंगे और हमारे प्रमुख पीछे हट जाएंगे,
गृह-प्रमुख विजयी होंगे, और हमारे प्रमुख हार जाएंगे,
विदेशी प्रमुख इस पक्ष से विजयी होंगे और हमारे प्रमुख हार जाएंगे,
इस प्रकार यह पक्ष विजयी होगा, वह पक्ष हारेगा।
‘परिव्राजक गौतम इस प्रकार की क्षुद्र कलाओं से दूर रहते हैं।’
- अथवा वह कह सकता हैः ‘जब कि निष्ठावान व्यक्तियों द्वारा दिए जाने वाले भोजन पर निर्वाह करने वाले कुछ परिव्राजक और ब्राह्मण निम्न स्तर की कलाओं द्वारा अपनी आजीविका कमाने के लिए अनुचित साधन अपनाते हैं, जैसे कि यह भविष्यवाणी करनाः
(1) चंद्र ग्रहण होगा,
(2) सूर्य ग्रहण होगा,
(3) नक्षत्रों का ग्रहण होगा,