सुधारक और उनकी नियति
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भोजन पर निर्वाह करने वाले कुछ परिव्राजक और ब्राह्मण निम्न स्तर की कलाओं द्वारा अपनी आजीविका कमाने के लिए अनुचित साधन अपनाते हैं, जैसेः (1) विवाहों के लिए शुभ दिन निश्चित करना जिसमें वधू अथवा वर को घर
लाया जाता है,
(2) विवाहों के लिए शुभ दिन निश्चित करना जिसमें वधू अथवा वर को भेजा
जाता है,
(3) शांति की संधियों को संपन्न करने के लिए शुभ समय निश्चित करना
(अथवा सद्भावना प्राप्त करने के लिए तंत्र-मंत्र का प्रयोग करना), (4) विद्वेष आरंभ करने के लिए शुभ समय निश्चित करना (अथवा विद्वेष उत्पन्न
करने के लिए तंत्र-मंत्र का प्रयोग करना),
(5) ऋण लेने के लिए शुभ समय निश्चित करना (अथवा पासा फेंकने में
सफलता के लिए तंत्र-मंत्र का प्रयोग करना),
(6) धन व्यय करने के लिए शुभ समय निश्चित करना (अथवा पासा फेंकने
वाले प्रतिद्वंद्वी के दुर्भाग्य के लिए तंत्र-मंत्र का प्रयोग करना), (7) लोगों को भाग्यशाली बनाने के लिए तंत्र-मंत्र का प्रयोग करना, (8) लोगों को भाग्यहीन बनाने के लिए तंत्र-मंत्र का प्रयोग करना, (9) गर्भपात कराने के लिए तंत्र-मंत्र का प्रयोग करना,
(10) किसी व्यक्ति की बत्तीसी जकड़ने के लिए जादू-टोना करना, (11) गूंगापन लाने के लिए जादू-टोना करना,
(12) किसी व्यक्ति से हार स्वीकार करवाने के लिए जादू-टोना करना, (13) बहरापन लाने के लिए जादू-टोना करना,
(14) मायावी आइने से भविष्य-सूचक उत्तर प्राप्त करना,
(15) किसी भूत ग्रस्त लड़की के माध्यम से भविष्य-सूचक उत्तर प्राप्त करना, (16) देवता से भविष्य-सूचक उत्तर प्राप्त करना,
(17) सूर्य की पूजा करना,
(18) श्रेष्ठतम की पूजा करना,
(19) अपने मुंह से आग की लपटें निकालना, और
(20) भाग्य की श्रीदेवी को उत्पे्ररित करना।
‘परिव्राजक गौतम इस प्रकार की क्षुद्र कलाओं से दूर रहते हैं।’
- अथवा वह कह सकता हैः ‘जब कि निष्ठावान व्यक्तियों द्वारा दिए जाने वाले भोजन पर निर्वाह करने वाले कुछ परिव्राजक और ब्राह्मण निम्न स्तर की कलाओं द्वारा