4. सुधारक और उनकी नियति - Page 57

42 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अपनी आजीविका कमाने के लिए अनुचित साधन अपनाते हैं, जैसेः

(1) निश्चित लाभ प्राप्त हो जाने पर किसी देवता को भेंट अर्पित करने की

प्रतिज्ञा करना,

(2) ऐसी प्रतिज्ञाओं के लिए प्रार्थना करना,

(3) मिट्टी के मकान में रहते हुए तंत्र-मंत्र का जाप करना, (4) पुंसत्व उत्पन्न करना,

(5) किसी आदमी को नपुंसक बनाना,

(6) आवासों के लिए शुभ स्थानों का निर्धारण करना,

(7) स्थानों को पवित्र बनाना,

(8) मुंह धोने का अनुष्ठान करना,

(9) नहाने का अनुष्ठान करना,

(10) बलि चढ़ाना,

(11 - 14) वमनकारी तथा रेचक दवाएं देना,

(15) लोगों को सिरदर्द से राहत दिलाने के लिए संस्कारित करना (अर्थात् छींकने

के लिए दवाई देना),

(16) लोगों के कानों में तेल डालना (या तो कान बड़े करने के लिए अथवा

कान के अंदर के घाव ठीक करने के लिए),

(17) लोगों की आंखें ठीक करना (उनमें दवायुक्त तेल की बूंदें डालकर ठंडक

पहुंचाना),

(18) नाक के जरिए दवाएं डालना,

(19) आंखों में सुरमा लगाना,

(20) आंखों के लिए मरहम देना,

(21) नेत्र-चिकित्सक के रूप में कार्य करना,

(22) शल्य-चिकित्सक के रूप में कार्य करना,

(23) बाल-चिकित्सक के रूप में कार्य करना,

(24) जड़ी-बूटियां देना, और

(25) बारी-बारी से दवाएं देना।

‘परिव्राजक गौतम इस प्रकार की तुच्छ कलाओं से दूर रहते हैं।’

‘बंधुओं, ये छोटी-छोटी बातें हैं, नैतिकता के अल्प ब्यौरे हैं, जिनके बारे में गैर-धर्मांतरित व्यक्ति तथागत की सराहना करते हुए बोल सकता है।’

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(आचरण पर लंबे परिच्छेद यहां पर समाप्त होते हैं)