44 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
उन्होंने अन्य सिद्धांतों को भी इसी प्रकार के सकारात्मक और व्यापक अर्थ प्रदान किए। बुद्ध के एक साधारण अनुयायी ने उन्हें एक बार अबौद्ध संन्यासी के इस उपदेश के बारे में बताया कि सर्वोच्च आदर्श, बुरे कार्यों, बुरे शब्दों, बुरे विचारों और बुरे जीवन की अनुपस्थिति में निहित है। बुद्ध की इस संबंध में टिप्पणी उल्लेखनीय है। उन्होंने कहाः
फ्अगर, यह सच होता तो हर दूध पीता बच्चा जीवन का आदर्श प्राप्त कर लेता... अच्छे और बुरे का ज्ञान जीवन है, और उसके बाद बुरे कार्यों, शब्दों, विचारों और जीवन के बदले अच्छे कार्यों, अच्छे शब्दों, अच्छे विचारों और अच्छे जीवन की प्राप्ति है। यह स्थिति केवल दृढ़ संकल्प और सतत प्रयास द्वारा लाई जा सकती है।........य्
बुद्ध के उपदेश केवल नकारात्मक नहीं थे। वे सकारात्मक और रचनात्मक हैं। बुद्ध अपने सिद्धांतों का अनुसरण करने वाले व्यक्ति से संतुष्ट नहीं होते थे। वह आग्रह करते थे कि दूसरों को उनका अनुसरण करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उदाहरणार्थ, अंगुत्तर निकाय में बुद्ध ने एक अच्छे मनुष्य और बहुत अच्छे मनुष्य में भेद करते हुए बताया है कि वह जो हत्या, चोरी, कामुकता, झूठ और नशे से दूर रहता है, उसे अच्छा मनुष्य कहा जा सकता है, लेकिन बहुत अच्छा कहलाने योग्य केवल वही मनुष्य होता है, जो स्वयं इन बुरी चीजों से दूर रहता है और दूसरों को भी इससे दूर रखने के लिए पे्ररित करता है।
जैसाकि ठीक कहा गया है, बौद्ध धर्म के दो महत्वपूर्ण गुण पे्रम और विवेक हैं।
वह गुण के रूप में पे्रम के व्यवहार को कितनी गंभीरता से हृदयगंम कराते थे, उन्हीं के शब्दों से स्पष्ट हो जाता हैµ‘जिस प्रकार अपने जीवन का खतरा उठाते हुए मां अपने शिशु की देख-भाल करती है, उसी प्रकार व्यक्ति को सभी प्राणियों के प्रति अपार पे्रम प्रदान करने के लिए मन बनाना चाहिए। उसे संपूर्ण विश्व के प्रति सद्भावना रखनी चाहिए, ऊपर-नीचे और उस पार सभी के लिए उसके मन में घृणाहीन और शत्रुता रहित अबाध पे्रम होना चाहिए। ऐसी जीवन-पद्धति विश्व में सर्वोत्तम है।’ बुद्ध ने ऐसा उपदेश दिया था। ख्1,
‘सभी पीडि़त प्राणियों के प्रति व्यापक दयाभाव, संवेदना, प्रत्येक प्रकार के संवेदनशील जीवन के प्रति सद्भावना तथागत (बुद्ध) की विशेषता थी, जैसे कि कुछ अन्य मानव पुत्रों में भी ये विशेषताएं रही हैं और वह अपने दृष्टिकोण को अनुयायियों तक पहुंचाने
- सुत्त निपात