4. सुधारक और उनकी नियति - Page 63

48 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

11-12. ‘उनका कहना है कि अनुष्ठानों के अनुसार विहित प्रार्थनाओं से, मानो कि वे पवित्र सूत्र उसे घायल करने के लिए अनगिनत बर्छियां हों, वध किया गया पशु स्वर्ग लोक को जाता है और इसी उद्देश्य से उसकी हत्या की जाती है। इस प्रकार व्याख्या करके इस कार्रवाई को विधिसम्मत माना जाता है। तथापि यह मिथ्या है। क्योंकि यह कैसे संभव है कि परलोक में कोई भी प्राणी दूसरों के द्वारा किए गए कार्य का फल भोग सकता है? और किस कारण से वह पशु, जिसकी बलि दी गई है, स्वर्गारोहण करेगा जब कि वह बुरे कार्मों से दूर न रहा हो और अच्छे कार्यों के लिए उसने स्वयं को समर्पित न किया हो? क्या केवल इसलिए वह स्वर्ग को जाएगा क्योंकि अपने स्वयं के कार्यों के आधार पर उसका वध नहीं हुआ है, बल्कि उसकी बलि दी गई है।

  1. ‘और अगर बलि में वध किया गया उत्पीडि़त प्राणी वास्तव में स्वर्ग को जाता है, तो क्या हमें ब्राह्मणों से यह आशा नहीं रखनी चाहिए कि वे बलि में आत्मदाह के लिए स्वयं को प्रस्तुत करें। लेकिन इस प्रकार की कोई प्रथा कहीं भी उनमें नहीं देखी जाती। तो फिर इन सलाहकारों द्वारा दी गई सलाह को कौन हृदगगंम कर सकता है?

  2. ‘जहां तक देवताओं का प्रश्न है, क्या हम यह विश्वास करें कि जो सुंदर अप्सराओं द्वारा परोसे गए स्वच्छ तथा अतुलनीय सुगंधियुक्त, स्वादिष्ट और गुणकारी व्यंजन ग्रहण करते हैं, क्या वे उसका त्याग करके दयनीय प्राणी के वध का आनंद उठाएंगे? क्या वे बलि में उन्हें भेंट किए गए प्राणी की ओझड़ी अथवा ऐसे अन्य अंगों का आनंदपूर्वक आस्वादन करेंगे?

‘इसलिए यह समय अमुक कार्य करने के लिए उपयुक्त है’, इस प्रकार इरादा करके राजा ने यह ढोंग किया कि वह बलि का आयोजन करने के लिए तत्पर हैं, और उनका समर्थन करते हुए वह उनसे इस प्रकार बोलेः ‘यह सच है कि आप जैसे महान सलाहकारों के होते हुए, जो कि मेरी प्रसन्नता के लिए कटिबद्ध हैं, मैं बहुत ही सुरक्षित और संतुष्ट हूं। इसलिए मैं एक हजार वध्य पुरुषों की बलि (पुरुषमेध) कराऊंगा। हर कारोबार के क्षेत्र में रत मेरे कर्मचारियों को इस प्रयोजन के लिए अपेक्षित वस्तुएं जुटाने के आदेश दे दिए जाएं। साथ ही सबके लिए डेरे डालने और अन्य भवनों का निर्माण करने हेतु सर्वोत्तम भूमि का पता चलाया जाए। साथ ही शुभ चंद्र दिवसों, करणों, मुहूर्तों और नक्षत्रों के बारे में विचार करके (ज्योतिषियों द्वारा) बलि के लिए उपयुक्त समय निश्चित किया जाए।’ पुरोहित ने उत्तर दिया, ‘अपने उद्यम में सफलता प्राप्त करने के लिए महामहिम को एक बलि के अंत में अवभृथ (अंतिम स्नान) करना होगा और तत्पश्चात् आप क्रमानुसार बलि करा सकते हैं। क्योंकि अगर एक हजार वध्य पुरुषों को एकदम पकड़ लिया जाए तो यह निश्चित है कि आपकी प्रजा आपको दोष देगी और वह एक बड़ा विद्रोह खड़ा कर देगी।’ अन्य ब्राह्मणों द्वारा पुरोहित की बात का अनुमोदन किए जाने पर राजा ने उत्तर दिया, ‘जनता के क्रोध की आशंका मत कीजिए। आदरणीय महानुभावों, मैं ऐसे कदम उठाऊंगा, जिससे मेरी प्रजा में किसी प्रकार का विद्रोह नहीं होगा।’