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सुधारक और उनकी नियति

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इसके पश्चात् राजा ने नगर-पुरुषों और भूधारकों की सभा बुलाई और कहा, ‘मेरा इरादा एक हजार नर-बलियां कराने का है। लेकिन मैं समझता हूं कि ईमानदारी से कार्य करने वाला कोई भी व्यक्ति अग्निदाह के लिए उपयुक्त नहीं है। इसी विचार से मैं आपको यह सलाह देता हूं कि आपमें से जिस किसी को आज के बाद नैतिक आचरण की सीमाओं का उल्लंघन और राजकीय इच्छा का निरादर करते हुए देखूंगा, उसे बलि के लिए पकड़वाने का आदेश दूंगा, क्योंकि मेरे विचार में ऐसा व्यक्ति अपने परिवार के लिए कलंक और मेरे देश के लिए खतरा होगा। इस संकल्प को लागू करने के उद्देश्य से दोष रहित और पैनी दृष्टि तथा सदैव सचेत रहने वाले दूत आपका निरीक्षण करते रहेंगे और आपके आचरण के संबंध में मुझे सूचना देंगे।’

तत्पश्चात सभा में अग्रिम पंक्ति के लोग हाथ जोड़कर और उन्हें माथे तक ले जाकर बोलेः

15-16. ‘महामहिम, आपके सभी कार्य आपकी प्रजा की प्रसन्नता के लिए होते हैं और उस आधार पर आपकी अवज्ञा करने का कारण ही क्या हो सकता है? यहां तक कि ब्रह्मा (देवता) भी केवल आपके व्यवहार का अनुमोदन ही कर सकता है। महामहिम, जो गुणीजनों पर अधिकार रखते हैं, वही हमारे लिए सर्वोत्तम अधिकारी हैं। इस कारण जिससे भी महामहिम को प्रसन्नता होती है, उससे हमें भी अवश्य प्रसन्नता होगी। वास्तव में आपको हमारे आनंद और हमारी भलाई के अलावा किसी भी चीज से प्रसन्नता नहीं मिलती।’

उसके पश्चात नगर और देश के गण्यमान्य लोगों ने जब इस प्रकार उनके आदेश को मान लिया, तो राजा ने सभी नगरों और देश-भर में ऐसे अधिकारियों को भेज दिया जो बाहरी शक्ल-सूरत से लोगों को इस कार्य के लिए उपयुक्त प्रतीत होते थे और उन्हें बुरा कार्य करने वालों को पकड़ने का काम सौंपा गया और प्रतिदिन डुग-डुगी बजाकर सर्वत्र इस प्रकार के आदेश की घोषण करने का आदेश दिया गया।

  1. ‘राजा सुरक्षा प्रदान करता है और उस नाते वह हमेशा ईमानदारी से रहने वाले, अच्छे आचरण वाले, संक्षेप में गुणीजन की सुरक्षा का आदेश देता है, फिर भी अपनी प्रजा के लाभ के लिए वह नर-बलि के इरादे से ऐसे लोगों में से हजारों वध्य मानवों को अलग कर लेना चाहता है, जो दुराचरण में आनंद लेते हैं।

  2. ‘इसलिए आज के बाद जो भी मनमाने तौर पर दुर्व्यवहार करेगा, हमारे राजा के आदेश की अवज्ञा करेगा, जिसके आदेश का पालन उसके अधीनस्थ राजा भी करते हैं, उसे उसी के कार्यों के कारण बलि के वध्य व्यक्ति के रूप में ले जाया जाएगा और लोग उसकी यातनापूर्ण पीड़ा को देखेंगे, जब कि वह पीड़ा से तड़पेगा और उसके शरीर को बलि-स्तंभ से कसकर बांध दिया जाएगा।’