4. सुधारक और उनकी नियति - Page 71

56 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

में हों, अथवा जो महत्वपूर्ण परिवार हों, चाहे वे देहात में हों अथवा नगरों में हों, उन्हें वह यह कहते हुए निमंत्रण भेजेः मैं एक बलि देना चाहता हूं, जिससे बहुत दिनों तक मुझे सुख-शांति और कल्याण प्राप्त हो सके।’ श्रद्धेय, उसके लिए अपनी स्वीकृति प्रदान करें।’

हे ब्राह्मण, राजा महाविगत ने अपने पुरोहित की बात मान ली और निमंत्रण भेजे। क्षत्रियों, ब्राह्मणों और अन्य गृहस्थों ने एक-जैसा उत्तर दियाः महामहिम, बलि संपन्न कराएं। राजन् समय उपयुक्त है।

इस प्रकार ये चारों सहमति से सहयोगी के रूप में बलि कराने के लिए साधन बन गए।

  1. राजा महाविगत निम्नलिखित आठ गुणों से युक्त थेः उनका जन्म मातृ पक्ष और पितृ पक्ष, दोनों की ओर से अच्छे कुल में हुआ था, उनकी पिछली सात पीढि़यां पवित्र तथा शालीन थीं, जन्म के संबंध में उन पर कोई कलंक नहीं लगा और किसी ने अंगुली नहीं उठाई।

वह सुंदर, आकर्षक, विश्वासोत्पादक, अत्यंत मनोहर स्वरूप वाले, गौर वर्ण और देखने में भव्य थे।

वह शक्तिशाली थे, प्रचुर धन-संपदा और विपुल संपत्ति से युक्त थे, चांदी और सोने, विलासिता सामग्री और अनाज के भंडारों से उनके कोष और धान्यागार परिपूर्ण रहते थे।

वह ताकतवर थे, स्वामिभक्त तथा अनुशासित चतुरंगिणी सेना (हाथी, घुड़सवार, रथ और धनुर्धर) उनके आदेशाधीन थी, मेरे विचार में अपनी कीर्ति द्वारा ही वह अपने शत्रुओं का दलन करते थे।

वह आस्थावान और उदार थे, शालीन दानी थे, घर खुला रखते, और उनके कुएं से सामान्य-जन और ब्राह्मण, निर्धन और राहगीर, भिखारी और याचक पानी भर सकते थे, वह अच्छे कार्यों के कर्ता थे।

वह सभी प्रकार के ज्ञान में अग्रणी थे।

वह कही गई बात का अर्थ समझते थे, और उसे समझा सकते थे, वह कहावत इस प्रकार है और इसका ऐसा अर्थ है।

वह बुद्धिमान, विशेषज्ञ और चतुर थे तथा वर्तमान अथवा भूत अथवा भविष्य के बारे में विचार कर सकते थे।

और उनके ये आठ गुण भी उस बलि के लिए साधन बन गए थे।