सुधारक और उनकी नियति
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- उनका ब्राह्मण (पुरोहित) इन चार गुणों से संपन्न थाµउसका जन्म मातृ पक्ष और पितृ पक्ष, दोनों की ओर से अच्छे कुल में हुआ था, उसकी पिछली सात पीढि़यां पवित्र तथा शालीन थीं, जन्म के संबंध में उस पर कोई कलंक नहीं लगा और किसी ने अंगुली नहीं उठाई।
वह आवृत्तिकर्ता विद्यार्थी था जिसे रहस्यवादी पद्य कंठस्थ थे, वह तीन वेदों का ज्ञाता था और उसके अनुक्रम, उनकी क्रिया-पद्धति, ध्वनि-शास्त्र और भाष्य से परिचित था। उसे पुराणों की जानकारी थी, वह मुहावरों और व्याकरण में निष्णात था, लोकायत (जनश्रुति संकलन) का अच्छा ज्ञान रखता था और एक महापुरुष के शरीर में विद्यमान तीस लक्षणों से परिचित था।
वह सदाचारी था, सदाचार के लिए सिद्ध हो गया था और ऐसे गुणों से जिनको महान माना जाता है, युक्त था।
वह बुद्धिमान, विशेषज्ञ और चतुर था। आदर-सत्कार करने वालों में उसका पहला नहीं, तो दूसरा स्थान अवश्य था। इस प्रकार उसके चार गुण भी बलि कराने के लिए साधन बन गए।
- और, हे ब्राह्मण, पुरोहित ने बलि प्रारंभ कराने से पहले राजा महाविगत को तीन विधियां समझाईः ‘अगर महामहिम राजा विशाल बलि प्रारंभ कराने से पूर्व इस प्रकार का कोई खेद महसूस करें, जैसेµहाय, इसमें मेरी धन-संपत्ति का काफी हिस्सा चला जाएगा, तो राजा को इस प्रकार के खेद को स्थान नहीं देना चाहिए। अगर महामहिम राजा विशाल बलि प्रस्तुत कराते हुए इस प्रकार का कोई
खेद महसूस करें, जैसे-हाय, इसमें मेरी धन-संपत्ति का काफी हिस्सा चला जाएगा, तो राजा को इस प्रकार के खेद को स्थान नहीं देना चाहिए। अगर महामहिम राजा विशाल बलि कराने के बाद इस प्रकार का कोई खेद महसूस करें, जैसेµहाय, इसमें मेरी धन-संपत्ति का काफी हिस्सा चला जाएगा, तो राजा को इस प्रकार के खेद को स्थान नहीं देना चाहिए।’
इस प्रकार, हे ब्राह्मण, बलि प्रारंभ कराने से पूर्व पुरोहित ने राजा महाविगत को तीन विधियां समझाईं।
- और इसके आगे, हे ब्राह्मण, बलि प्रारंभ होने से पूर्व किसी भी ऐसे पश्चाताप के निवारण के लिए, जो बाद के दस दिनों में उन लोगों के संबंध में उत्पन्न हो सकता है जिन्होंने उसमें भाग लिया हो, पुरोहित ने कहा, ‘हे राजन्, आपके द्वारा आयोजित बलि में ऐसे मनुष्य आएंगे जो जीवित प्राणियों का जीवन नष्ट करते हैं। और ऐसे भी जो उससे दूर रहते हैं, ऐसे मनुष्य जो उन चीजों को ग्रहण करते हैं जो उनको न दी गई हों और ऐसे भी जो उनसे दूर रहते हैं। ऐसे मनुष्य जो झूठ