4. सुधारक और उनकी नियति - Page 79

64 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अम्बट्ठ सुत्त

(एक युवा ब्राह्मण की अशिष्टता और एक वृद्ध की निष्ठा)

  1. मैंने इस प्रकार सुना है। एक बार जब महाभाग कौशल देश की यात्रा के दौरान लगभग पांच सौ बांधवों सहित कौशल के इच्छानंगल नामक ब्राह्मण के गांव में पहुंचे, और वह वहां के इच्छानंगल अरण्य में ठहरे।

उस समय पोष्करसाति नामक ब्राह्मण उक्कट्ठा में निवास करता था। वह स्थल चहल-पहल, हरियाली और वन्य भूमि तथा धान्य से परिपूर्ण था। कौशल-नरेश प्रसेनजित ने यह क्षेत्र उन्हें उपहार के रूप में प्रदान किया था, जिस पर उन्हें राजा के समान अधिकार प्राप्त था।

  1. अब पोष्करसाति ब्राह्मण ने यह समाचार सुनाः ‘लोग कहते हैं कि शाक्य वंश के श्रमण गौतम शाक्य परिवार का त्याग करके धम्म (धार्मिक) जीवन अंगीकार करने के लिए बड़ी संख्या में अपने संघ के बांधवों के साथ इच्छानंगल में पहुंच गए हैं और वहां अरण्य में ठहरे हुए हैं। अब जहां तक श्रद्धेय गौतम का संबंध है, उनकी इतनी ख्याति है कि विदेश में भी उनकी ऐसी चर्चा हैः महाभाग एक अर्हत, पूर्ण प्रबुद्ध, विवेक और सौजन्य से परिपूर्ण, लौकिक ज्ञान से पुष्ट, मार्गदर्शन के इच्छुक नश्वरों के लिए अनुपम पथप्रदर्शक, देवों और मनुष्यों के लिए उपदेशक, वरदान प्राप्त हैं। वह स्वयं देवताओं, ब्राह्मणों और असम प्रदेश की पहाडि़यों पर मर भाषा बोलने वाले लोगों के ऊपर के लोक और उसके नीचे संन्यासियों तथा ब्राह्मणों, राजाओं और प्रजाजन वाले लोक सहित संपूर्ण सृष्टि को इस प्रकार जानने के बाद, वह अपने ज्ञान की जानकारी दूसरों को कराते हैं। सत्य, जो अपने मूल में सुंदर है, प्रगति में सुंदर है, संपूर्णता में सुंदर है, उसी की उद्घोषणा वह भावना और शब्द में करते हैं, वह उच्चतर जीवन की पूर्णता और पवित्रता का भरपूर ज्ञान कराते हैं।’

और उस प्रकार के अर्हत के दर्शनार्थ जाना अच्छा है।

  1. और उस समय अम्बट्ठ नामक युवा ब्राह्मण पोष्करसाति ब्राह्मण का एक शिष्य था। वह जाप करता था (पवित्र शब्दों का), उसे रहस्यवादी पद्य कंठस्थ थे, वह तीनों वेदों का ज्ञाता था, उनके अनुक्रम, उनकी क्रियापद्धति, ध्वनिशास्त्र और भाष्य (चतुर्थ रूप में) तथा पंचमशास्त्र के रूप में दंतकथाओं का अच्छा ज्ञान था। वह मुहावरों और व्याकरण में निष्णात था, वह लोकायत, कूट तार्किकता और एक महापुरुष के शरीर पर विद्यमान लक्षणों से संबंधित शस्त्र से सुपरिचित था, त्रिसूत्री वैदिक ज्ञान पद्धति में उसे इतना पारंगत माना जाता था कि उसका गुरु भी उसके संबंध में यह कहता था, ‘जो कुछ मैं जानता हूं वह तुम जानते हो, और जो तुम जानते हो वह मैं जानता हूं।’

  2. और पोष्करसाति ने अम्बट्ठ को यह समाचार सुनाया और कहाः ‘प्रिय अम्बट्ठ, श्रमण गौतम के पास जाओ और यह पता लगाओ कि विदेश में उनकी ख्याति का जो