4. सुधारक और उनकी नियति - Page 85

70 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

‘राजा को कोई क्षति नहीं पहुंचेगी। किंतु उसने अगर बाण नीचे की ओर छोड़ा तो उसके राज्य-पर्यन्त धरती सूख जाएगी।’

‘श्रीमन्, राजा की रक्षा कीजिए और देश की भी।’

‘राजा को कोई क्षति नहीं पहुंचेगी, न उसकी भूमि को। किंतु उसने अगर ऊपर को बाण छोड़ा, तो देवता सात वर्षों तक उसके राज्य-पर्यन्त वर्षा नहीं करेंगे।’

‘श्रीमन्, राजा की रक्षा कीजिए और देश की भी, और देवता को वृष्टि करने दीजिए।’

‘राजा को कोई क्षति नहीं पहुंचेगी और न भूमि को ही, और देवता वृष्टि करेंगे। लेकिन राजा अपने सबसे बड़े पुत्र पर बाण चलाए। राजकुमार को कोई क्षति नहीं पहुंचेगी, उसका बाल भी बांका नहीं होगा।’

तब हे ब्राह्मणों, मंत्रियों ने ओक्काक को यह बताया और कहाः ‘राजन, अपने सबसे बड़े पुत्र पर बाण छोड़ें, उसे कोई हानि अथवा भय नहीं होगा।’ और राजा ने ऐसा ही किया, और कोई क्षय नहीं हुआ। किंतु राजा ने जो पाठ पढ़ा था, उससे आतंकित होकर उसने उस पुरुष को पत्नी के रूप में अपनी पुत्री मद्दरूपी दे दी। हे ब्राह्मणों, आपको दासी कुल के मामले में अम्बट्ठ का इतना और अपमान नहीं करना चाहिए। वह कान्हा शक्तिशाली सिद्ध पुरुष था।

  1. तब महाभाग ने अम्बट्ठ को कहाः ‘अम्बट्ठ, इस बारे में तुम क्या सोचते हो? अगर एक युवा क्षत्रिय का संबंध किसी ब्राह्मण कन्या से हो जाता है और उनके सहवास से एक पुत्र का जन्म होता है। क्या ऐसा पुत्र ब्राह्मणों से आसन और जल (आदर के प्रतीक के रूप में) प्राप्त कर सकेगा?’

‘हां, गौतम, वह करेगा।’

‘लेकिन क्या ब्राह्मण उसे पितरों के निमित्त आयोजित भोज, अथवा दूध में उबाले गए खाद्य, अथवा देवताओं को दी जाने वाली भेंट, अथवा उपहार के रूप में भेजे जाने वाले भोजन में सम्मिलित होने की अनुमति देंगे?’

‘हां, गौतम, वे अनुमति देंगे।’

‘लेकिन ब्राह्मण उसे अपने पद्य सिखाएंगे अथवा नहीं?’

‘हां, गौतम, वे सिखाएंगे।’

‘किंतु उनकी स्त्रियों से उसे अलग रखा जाएगा अथवा नहीं।’

‘उसे अलग नहीं रखा जाएगा।’

‘किंतु क्या क्षत्रिय उसे एक क्षत्रिय के रूप में संस्कारित होने की अनुमति देंगे?’

‘निश्चित रूप से नहीं, गौतम।’