सुधारक और उनकी नियति
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‘क्योंकि मातृ पक्ष की ओर से उसका वंश शुद्ध नहीं है।’
- ‘अब तुम इस बारे में क्या सोचते हो, अम्बट्ठ? अगर एक युवा ब्राह्मण का संबंध किसी क्षत्रिय कन्या से हो जाता है और उनके सहवास से एक पुत्र का जन्म होता है’ क्या ऐसा पुत्र ब्राह्मणों से आसन और जल (आदर के प्रतीक के रूप में) प्राप्त कर सकेगा?’
‘हां, गौतम, वह करेगा।’
‘किंतु क्या ब्राह्मण उसे पितरों के निमित्त आयोजित भोज, अथवा दूध में उबाले गए
खाद्य, अथवा देवताओं को दी जाने वाली भेंट, अथवा उपहार के रूप में भेजे जाने वाले भोजन में सम्मिलित होने की अनुमति देंगे?’
‘हां, गौतम, अनुमति देंगे।’
‘किंतु ब्राह्मण उसे अपने पद्य सिखाएंगे अथवा नहीं?’
‘हां, गौतम, वे सिखाएंगे।’
‘किंतु क्या क्षत्रिय उसे एक क्षत्रिय के रूप में संस्कारित होने की अनुमति देंगे?’
‘निश्चित रूप से नहीं, गौतम।’
‘उसकी अनुमति क्यों नहीं?’
‘क्योंकि पितृ पक्ष की ओर से उसका वंश शुद्ध नहीं है।’
- ‘तब तो, अम्बट्ठ, चाहे स्त्रियों की स्त्रियों से और पुरुषों की पुरुषों से तुलना करें, क्षत्रिय श्रेष्ठ हैं और ब्राह्मण हेय हैं। और, अम्बट्ठ, इस बारे में तुम क्या सोचते हो? अगर ब्राह्मण किसी अपराध के कारण किसी ब्राह्मण को न्याय के लाभ से वंचित कर दे, उसका मुंडन करके उसके सिर पर राख मलकर उसे भूमि और बस्ती से निष्कासित कर दे, क्या उस ब्राह्मण को ब्राह्मणों के मध्य आसन अथवा जल प्रदान किया जाएगा?’
‘कदापि नहीं, गौतम।’
‘अथवा ब्राह्मण उसे पितरों के निमित्त आयोजित भोज, अथवा दूध में उबाले गए
खाद्य, अथवा देवताओं को दी जाने वाली भेंट, अथवा उपहार के रूप में भेजे जाने वाले भोजन में सम्मिलित होने की अनुमति देंगे?’
‘कदापि नहीं, गौतम।’
‘अथवा ब्राह्मण उसे अपने पद्य सिखाएंगे या नहीं।’
‘कदापि नहीं, गौतम।’
‘और उसे उनकी स्त्रियों से अलग रखा जाएगा या नहीं?’
‘उसे अलग रखा जाएगा।’