सुधारक और उनकी नियति
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‘हां, श्रीमन्, हुई।’
‘और वार्ता कैसी रही?’
तब अम्बट्ठ ने ब्राह्मण पोष्करसाति को उस पूरी बातचीत से अवगत कराया, जो कि महाभाग के साथ हुई थी।
जब वह इस प्रकार बोल चुका, तो पोष्करसाति ने उससे कहाः ‘ओह, तुम कैसे ज्ञानाभिमानी हो। कितने मंदबुद्धि हो। ओह, तुम हमारे तीनों वेदों की विशेष जानकारी रखते हो। उनका कहना है कि जो मनुष्य इस प्रकार कार्य करता है, मृत्यु के पश्चात शरीर के क्षय हो जाने पर कष्ट और पीड़ा की निराशाजनक स्थिति में पुनर्जन्म लेता है। अपने अशिष्ट शब्दों में तुमने जिन प्रश्नों पर बल दिया, उनका क्या परिणाम? क्या वही नहीं है, जिसका कि श्रद्धेय गौतम ने प्रकटीकरण किया है? कितने ज्ञानाभिमानी, कितने मंदबुद्धि और हमारे तीनों वेदों के ज्ञान में निष्णात।’ और क्रोधित तथा अप्रसन्न होकर उसने अम्बट्ठ को पैर मारकर धकेल दिया और उसने तत्काल महाभाग से मिलना चाहा।
लेकिन वहां मौजूद ब्राह्मणों ने पोष्करसाति से इस प्रकार कहाः ‘श्रीमन्, आज श्रमण गौतम से मिलने के लिए बहुत देर हो चुकी है। सम्माननीय पोष्करसाति कल यह कार्य कर सकते हैं।’
पोष्करसाति ने अपने ही घर में पुष्ट और नरम, दोनों ही प्रकार का मीठा भोजन तैयार करवाया और मशालों की तेज रोशनी में उसे वाहनों में रखवाया और उक्कट्ठा को चल पड़े। और वह स्वयं इच्छानंगल वनखंड की ओर अपना रथ हांकते हुए उस स्थान तक गया जहां तक वाहनों के लिए मार्ग सुगम था, और उसके बाद पैदल ही महाभाग के पास गया और जब उसने नम्रता तथा शालीनतापूर्वक महाभाग से अभिवादन और सम्मान का आदान-प्रदान कर लिया, तो उसने एक तरफ आसन ग्रहण कर लिया और महाभाग से बोलाः
- ‘गौतम, क्या हमारा युवा शिष्य ब्राह्मण अम्बट्ठ यहां होकर गया है?’
‘हां, ब्राह्मण, वह यहां आया था।’
‘और, गौतम, क्या आपने उससे बात की थी?’
‘हां, ब्राह्मण, मैंने की थी।’
‘और आपने उससे किस विषय पर बात की थी?’
तब महाभाग ने, जो भी बात हुई थी, उसके बारे में ब्राह्मण पोष्करसाति को बताया, और जब वह इस प्रकार बोल चुके, तो पोष्करसाति ने महाभाग से कहाः ‘गौतम, वह युवा ब्राह्मण अम्बट्ठ अज्ञानी और मूर्ख है। गौतम, उसे क्षमा कर दीजिए।’
और ब्राह्मण पोष्करसाति ने महाभाग के शरीर को ध्यानपूर्वक देखा और उस पर