सुधारक और उनकी नियति
नहीं थाµमहाभाग को संबोधित किया और कहाः
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‘परम श्रेष्ठ, हे गौतम, आपके मुख से निकले ये शब्द परम श्रेष्ठ हैं। ठीक ऐसे ही, जैसे कोई मनुष्य किसी फेंकी हुई चीज को फिर से स्थापित करे, अथवा उसे प्रकट करे जो कुछ छिपाया गया हो, अथवा भटके हुए को सही मार्ग दिखाए, अथवा अंधेरे में प्रकाश ले आए जिससे आंखों वाले बाह्य रूपों को देख सकें, ठीक उसी प्रकार, स्वामी, श्रद्धेय गौतम ने मुझे विभिन्न रूपों में सत्य का ज्ञान कराया है। और मैं, हे गौतम, अपने पुत्रों, अपनी पत्नी, अपने संगी-साथियों सहित सत्य और संघ के लिए अपने पथप्रदर्शक के रूप में श्रद्धेय गौतम की शरण में आता हूं। श्रद्धेय गौतम, मुझे एक ऐसे शिष्य के रूप में स्वीकार करें, जिसने आज से जीवन-पर्यन्त उन्हें अपना पथप्रदर्शक बना लिया है। और जिस प्रकार श्रद्धेय गौतम उक्कट्ठा में अन्य लोगों के परिवारों और अपने शिष्यों के पास जाते हैं, वह मेरे परिवार में भी आएं। और वहां जो कोई भी हों, ब्राह्मण अथवा उनकी पत्नियां, वे श्रद्धेय गौतम के प्रति सम्मान व्यक्त करेंगे, अथवा उनकी उपस्थिति में
खड़े होंगे, अथवा उन्हें आसन और जल भेंट करेंगे, अथवा उनकी उपस्थिति से प्रसन्न होंगे, उन्हें दीर्घकाल तक सुख और आनंद की प्राप्ति होगी।’
‘जो तुम कहते हो, ब्राह्मण, वह ठीक है।’
(यहां अम्बट्ठ सुत्त समाप्त होता है)
VI
जाति के विरोध के मामले में बुद्ध ने जो शिक्षा दी, उसी को व्यवहार में भी लाए। उन्होंने वही किया, जिसे आर्यों के समाज ने करने से इंकार कर दिया था। आर्यों के समाज में शूद्र अथवा नीच जाति का मनुष्य कभी ब्राह्मण नहीं बन सकता था। किंतु बुद्ध ने जातिप्रथा के विरुद्ध केवल प्रचार ही नहीं किया, अपितु शूद्र तथा नीच जाति के लोगों को भिक्षु का दर्जा दिलाया, जिनका बौद्धमत में वही दर्जा है, जो ब्राह्मणवाद में ब्राह्मण का है।
सर्वप्रथम, स्वयं अपने संघ के संबंध में, जिस पर केवल उनका ही पूर्ण नियंत्रण था, वह जन्म, व्यवसाय और सामाजिक दर्जे से प्राप्त होने वाले सभी प्रकार के लाभों और हानियों की पूर्णतः तथा नितांत उपेक्षा करते हैं, और मात्र आनुष्ठानिक अथवा सामाजिक अशुचिता के मनमाने नियमों से उत्पन्न होने वाली बाधाओं और अयोग्यताओं को मिटा देते हैं।
उनके संघ के सर्वाधिक प्रख्यात सदस्यों में से एक था उपाली, जिसका उल्लेख संघ के नियमों के संबंध में स्वयं गौतम के बाद प्रमुख प्राधिकारी के रूप में किया जाता था, जो पहले नाई का काम करता था, जिसे घृणित व्यवसायों में से एक माना जाता है।