ग्यारहवीं पहेली
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उनका (महादेव) उपहास किया था। क्रोध के वशीभूत उन्होंने भृगु देवता को पृथ्वी
पर पटक दिया जिसके कारण उसकी आंखें बाहर निकल आईं क्योंकि जब दक्ष
देव सभा में शिव को शाप दे रहे थे, तब उन्होंने (भृगु) ने दक्ष को आंखों के
इशारे से उकसाया था। इसके पश्चात् उन्होंने पूषा के दांत तोड़ डाले ठीक उसी
प्रकार जैसे बलि ने कलिंग राज के किए थे क्योंकि जब दक्ष महादेव जी को
अपमानित करते हुए गालियां बक रहे थे तो पूषा दांत निपोड कर हंस रहा था।
फिर वे दक्ष की छाती पर बैठकर एक तेज तलवार से उसका सिर काटने लगे।
परन्तु बहुत प्रयास करने पर भी वे उस समय उसे धड़ से अलग न कर सके।
जब किसी भी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र से दक्ष की त्वचा नहीं कटी तो त्र्यम्यक
(वीरभद्र अथवा शिव) को बड़ा आश्चर्य हुआ और वे बहुत देर तक विचार करते
रहे। फिर उन्होंने यज्ञ-मंडप में यज्ञ पशुओं को जिस प्रकार मारा जाता था, उसी
प्रकार दक्ष रूप उस यजमान पशु का सिर धड़ से अलग कर दिया। देवताओं
ने सारी घटना स्वयंभू को बतायी जो वहां विष्णु के साथ उपस्थित नहीं थे।
(स्कंध 6)। ब्रह्मा ने देवताओं से परामर्श किया कि शिव को शांत किया जाए
जिन्हें गलत ढंग से यज्ञ के हव्य से वंचित कर दिया गया था। तदनंतर ब्रह्मा के
नेतृत्व में देवता कैलाश की ओर चले। ब्रह्मा जी ने शिव से कहा कि मैं जानता
हूं आप सम्पूर्ण जगत के स्वामी हैं क्योंकि विश्व योनि शक्ति और उसके बीज
से परे जो एक रस ब्रह्म है, वह आप ही हैं। ब्रह्मा ने कहा कि आप ही सम्पूर्ण
यज्ञ को पूर्ण कराने वाले हैं। यज्ञ में हिस्सा पाने का आपको पूरा अधिकार है।
फिर भी इस दक्ष यज्ञ में बुद्धिहीन याचकों ने आपको यज्ञ में भाग नहीं लेने दिया,
इसी से यह आपके द्वारा ध्वस्त हुआ। अब आप इस यज्ञ का पुनरुद्धार करने
की कृपा करें। हे यज्ञ विध्वंसक! आज यह यज्ञ आपके द्वारा पूर्ण हो। इसके
बाद (अध्याय 7) के अनुसार महादेव संतुष्ट हो गए’’।
दक्ष का यज्ञ भंग करने की घटना से बढ़कर और कोई प्रयास नहीं हो सकता कि शिव वैदिक देवों के द्रोही थे।
अब हम कृष्ण पर आते हैं।
कृष्ण नाम के चार व्यक्ति हुए हैं। एक कृष्ण सत्यवती के पुत्र और धृतराष्ट्र, पाण्डु तथा विदुर के पिता हैं, दूसरे कृष्ण सुभद्रा के भाई और अर्जुन के मित्र हैं, तीसरे कृष्ण मथुरा के वासुदेव और देवकी के पुत्र हैं, चौथे कृष्ण गोकुल के नंद और यशोदा के पुत्र हैं जिन्होंने शिशुपाल वध किया। यदि कृष्ण गोकुल के नंद और यशोदा के पुत्र हैं, जिन्होंने शिशुपाल वध किया, यदि कृष्ण भक्तों के कृष्ण वही हैं जो देवकी के पुत्र हैं तो इसमें कोई संदेह नहीं कि वे वेद द्रोही थे। छादोग्य उपनिषद् में आया है कि ऐसा लगता है कि वे घोर आंगिरस कुल से थे। घोर आंगिरसों ने