86 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
उन्हें क्या शिक्षा दी? छांदोग्य उपनिषद कहता हैः
‘‘आंगिरस के कुल से घोरों ने देवकी पुत्र कृष्ण से कहा (रहस्यमय दंतकथा)
कि वे इच्छा रहित हैं जैसे मृत्यु के समय मनुष्य को तीन बातें कहीं जाती हैं।
तुम अविनाशी हो, तुम अक्षय हो, और तुम जीव के सूक्ष्म तत्व हो।
घोर जाति के आंगिरस कुल के एक व्यक्ति ने देवकी पुत्र कृष्ण को यज्ञ की यह
पद्धति बताई और उसके अनुगामियों ने तब कहा, आदि। इस क्रम में अंतिम शब्द
कहा ‘उन’ इन तीनों के पश्चात् हैं... और इस सिद्धांत को सुनकर वह प्रत्येक ज्ञान
सभी इच्छाओं के प्रति वीतरागी हो गए। पुरुष यज्ञ के इस ज्ञान की उन्होंने इस प्रकार
प्रशंसा की। यह इतना विलक्षण है कि उसने देवकी पुत्र कृष्ण की अन्य ज्ञान के
प्रति सभी तृष्णाओं को शांत कर दिया। अब वह यह बताते हैं जो घोर अंगिरस ने
कृष्ण को गुरुमंत्र देते हुए कहा था, वह इस प्रकार है- ‘‘जो अपने मृत्यु काल में
उपरोक्त यज्ञ से भिज्ञ होता है वह इन तीन शब्दों को कह ‘‘प्रणसमसितम्’’ जिसका
अर्थ है, तू ही अति सूक्ष्म है, तू ही अति गूढ़ प्राण तेज है।’’
यह स्पष्ट है कि घोर आंगिरस ने कृष्ण को आध्यात्मिक मुक्ति का जो उपदेश दिया, वह वेदों और वैदिक उपासना के प्रतिकूल थी। इसके विपरीत विष्णु वैदिक देव हैं फिर भी उनकी उपासना शिव उपासना के काफी समय बाद आरंभ हुई। यह समझना अत्यंत कठिन है कि विष्णु की इतनी उपेक्षा क्यों हुई?
इसी प्रकार राम यद्यपि वेदद्रोही नहीं है तथापि वेदों में उनका उल्लेख नहीं है। उनकी उपासना की क्या आवश्यकता थी? वह भी इतने दिनों बाद?
एक पूर्व अध्याय में ब्रह्मा, विष्णु और शिव के उत्थान-पतन का प्रसंग पहले ही आ चुका है। पद और सत्ता का संघर्ष इन तीनों देवताओं तक सीमित था। उन्हें किसी तीसरे देवता से नीचे की कोटि में नहीं रखा गया। परंतु एक समय आया जब इन्हें श्री नामक एक देवी के नीचे माना जाने लगा। यह कैसे हुआ? यह देवी भागवत में वर्णित है। देवी भागवत ख्1, का कथन है कि श्री नामक देवी से संपूर्ण जगत की उत्पत्ति हुई और यही देवी है जिसने ब्रह्मा, विष्णु और शिव को उत्पन्न किया। देवी भागवत का मत है कि देवी की इच्छा अपनी हथेलियां रगड़ने की हुई। हथेलियां रगड़ने से एक चमक निकली। उस चमक से ब्रह्मा पैदा हुए। जब ब्रह्मा पैदा हो गए तो देवी ने उससे विवाह करने को कहा। ब्रह्मा ने यह कहकर इंकार कर दिया कि वह तो उनकी मां हैं। देवी कुपित हो उठी और उसने अपने कोप से ब्रह्मा को भस्म कर दिया। देवी ने दूसरी बार अपनी हथेलियां रगड़ी, फिर चमक पैदा हुई और दूसरा पुत्र उत्पन्न हुआ। वह था विष्णु।
- सत्यार्थ प्रकाश में संक्षिप्तीकरण।