बारहवीं पहेली
ब्राह्मणों ने देवताओं का मुकुट क्यों उतारा
और देवियों की ताजपोशी की?
सामान्यतः देवताओं की उपासना सभी करते हैं, परन्तु देवियों की पूजा अनोखी होती है इसका कारण यह है कि देवता सामान्यतः अविवाहित होते हैं और कोई पत्नियां नहीं होतीं जिन्हें देवियों का स्थान दिया जा सके। देवता के विवाहित होने पर कैसा विवाद हो सकता है, यह इससे प्रकट होता है कि यहूदियों को ईसाई इस बात से सहमत नहीं कर सके कि ईसा परमात्मा के पुत्र हैं। यहूदियों ने कहा कि ईश्वर का विवाह ही नहीं हुआ तो ईसा ईश्वर पुत्र कैसे हो सकते हैं?
हिंदुओं में स्थिति ठीक विपरीत है। वे केवल देवताओं की उपासना ही नहीं करते बल्कि वे देवियों की पूजा भी करते हैं। यह परम्परा आरंभ से ही है।
ऋग्वेद में अनेक देवियों का उल्लेख है जैसे पृथ्वी, अदिति, दिति, निश्तिग्री, इन्द्राण् ा, प्रिशनी, उषा, सूर्या, अग्नयी, वरुणानी, रौद्रसी, राका, सिनिवली, श्रद्धा, अरामति, अप्सरा और सरस्वती।
पृथ्वी अत्यंत प्राचीन आर्य देवी है।
उसे द्यौस, स्वर्ग अथवा पारजन्य की पत्नी कहा जाता है। पृथ्वी बहुत महत्वपूर्ण देवी है और कई देवताओं की माता कहलाती है।
अदिति भी कालक्रम की दृष्टि से प्राचीन वैदिक देवी है। उसे देवताओं की शक्तिशाली माता कहा गया है। मित्र, आर्यमान् और वरुण उसके पुत्र हैं। ऋग्वेद से यह पता नहीं चलता कि उसका विवाह किससे हुआ था? हम दिति के विषय में
अंग्रेजी के मूल लेख का शीर्षक ‘‘वैदिक और अवैदिक देवियां’’ था। इस अध्याय की विषय-वस्तु और अंतिम पैरा के संदर्भ में इसे पहेली 12 में सम्मिलित किया गया है। यह अंग्रेजी में इक्कीस पृष्ठ की टंकित प्रति थी जिसमें लेखक ने कतिपय सुधार-संशोधन किए थे और अपने हाथ से अंतिम पैरा संशोधित किया था। - संपादक