बारहवीं पहेली
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इससे अधिक कुछ नहीं जानते कि वह अदिति के समान किन्तु विपरीत देवी है। और कालातीत में हिंदू पुराणों के अनुसार देवों के शत्रु दैत्य उसी के पुत्र हैं।
देवी निश्तिग्री इन्द्र की माता है और इन्द्राणी इन्द्र की पत्नी है। प्रिश्नी मारुत की माता है। ऊषा आकाश की पुत्री बताई गई है, भग की बहन और वरुण की संबंधी तथा सूर्य की पत्नी है। सूर्या सूर्य की पुत्री और अश्विनियों अथवा सोम की पत्नी है।
अग्नयी, वरुणानी, रौद्रसी क्रमशः अग्नि, वरुण और रुद्र की पत्नियां हैं। अन्य देवियां या तो नदियों का मानवीकरण हैं अथवा उनका विवरण प्राप्त नहीं है।
इस विश्लेषण से दो बातें स्पष्ट हैं। पहली बात यह है कि हिंदू देवता विवाह-बंधन में बंध सकते हैं और उनके भक्तों को इस बात से कोई परेशानी नहीं होती कि उनका आराध्य एक आम आदमी से इस संबंध में बेहतर नहीं है। दूसरी बात यह है कि देवताओं की पत्नियां स्वतः ही पूजनीय देवी बन जाती हैं जो देव उपासकों द्वारा पूजी जाने लगती हैं।
वैदिक काल को छोड़कर पौराणिक काल पर आते हैं तो हमारा परिचय अनेक देवियों से होता है जैसे, देवी, उमा, सती, अम्बिका, पार्वती, हेमावती, गौरी, काली, निऋति, चण्डी और कात्यायनी, दुर्गा, दसभुजा, सिंहवाहिनी, महिषासुरमर्दनी, जगत्धात्री, मुक्तकेशी, तारा, छिन्नमस्तिका, जगदगौरी, प्रत्यांगिरा, अन्नपूर्णा, गणेशजननी, कृष्णकरोर और लक्ष्मी। यह पता लगाना अत्यंत कठिन है कि इन देवियों में कौन क्या है। पहली कठिनाई तो यह है कि ये सभी अलग-अलग देवियां हैं अथवा एक देवी के कई पर्याय हैं। उनके माता-पिता के संबंध में निश्चयपूर्वक कुछ नहीं कहा जा सकता। न ही कोई निश्चित रूप से यह कहा जा सकता है कि उनके पति कौन हैं?
एक उल्लेख से उमा, देवी, सती, पार्वती, गौरी और अम्बिका एक ही देवी के पर्याय हैं। दूसरी ओर कुछ ने कहा है कि देवी दक्ष की पुत्री है, अम्बिका रुद्र की भगिनी है, पार्वती के संबंध में वाराह पुराण ने उसका आविर्भाव इस प्रकार बताया ख्1, है।
ब्रह्मा जब एक बार शिव से मिलने कैलास पर गए तो उन्हें सम्बोधन किया गया,
‘‘ब्रह्मा! शीघ्र कहो तुम मेरे पास क्यों आए हो?’’ ब्रह्मा ने उत्तर दिया, ‘‘एक
शक्तिशाली असुर अंधक (अंधकार) है जिससे सभी देव त्रस्त हैं। परित्राण के लिए
आए देवों की शिकायत लेकर मैं तुम्हारे पास चला आया।’’ फिर ब्रह्मा ने उत्सुकता
से शिव की ओर देखा जिन्होंने विचार कर विष्णु को अपने पास बुलाया। जैसे ही
इन तीन देवों ने एक-दूसरे से नजरें मिलाइंर्, उसकी आभा से एक नीलाभ दिव्य
- विलकिंस में उद्धृत ‘‘हिंदू माइथालोजी’’ पृ. 290-91