चौदहवीं पहेली: अहिंसा से हिंसा पर वापसी - Page 125

चौदहवीं पहेली

अहिंसा से हिंसा पर वापसी

‘‘हिंसा से अहिंसा तक’’ अहिंसा की कहानी का मात्र एक भाग है। कहानी का एक दूसरा हिस्सा भी है, जिसकी व्याख्या ‘‘अहिंसा से हिंसा पर वापसी’’ शीर्षक के अन्तर्गत की जा सकती है। कहानी के दूसरे हिस्से से यह स्पष्ट हो जाएगा कि तंत्र और तंत्रवाद की धार्मिक परम्पराएं थीं, जिनका सन्दर्भ पहले दिया जा चुका है।

तांत्रिक पूजा के लिए ‘‘पंच मकार’’ अनिवार्य है। इन पंच मकारों में निम्न वस्तुएं होती हैः

  1. विभिन्न प्रकार के तरल पदार्थ एवं मद्य पान (मद्य)

  2. मांस-भक्षण (मांस)

  3. मछली-भक्षण (मत्स्य)

  4. भुने अनाज खाना (मुद्रा)

  5. सहवास (मैथुन)

यह कहना निरर्थक है कि मैथुन धार्मिक कर्मकांड का एक अंग है। मद्य और मांस का प्रसंग पर्याप्त रहेगा।

तंत्र के प्रथम चार कार्यों के लिए बारह प्रकार की मदिरा का विधान है। तीन प्रकार की शराब और तीन प्रकार का मांस बताया गया है। एक प्राचीन ऋषि पौलस्त्य ने भी, जो कई संहिताएं लिख चुके हैं, बारह प्रकार की मदिरा का उल्लेख किया है, जो इस प्रकार हैः

  1. पनसा (फल) से निकाली गई शराब, जिसे कटहल-शराब कहा जाता है,

मूल अंग्रेजी में यह ‘अहिंसा’ पर पिछले अध्याय के निरंतर क्रम में आया छह पृष्ठ का आलेख है, जिसमें लेखक ने स्वयं कुछ संशोधन किए हैं। - संपादक