चौदहवीं पहेली: अहिंसा से हिंसा पर वापसी - Page 127

112 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

और यह निश्चित है कि उसको मदिरापान के सुख का ध्यान भी नहीं था। परन्तु

एक आस्थावान कौल के अनुकूल वह अपने धर्म-पालन के लिए धर्मभीरुता के

कारण प्रतिबद्ध थी। और भी हजारों का यही हाल है। मुझे इसका पूरा विश्वास

है बंगाल के जिन भागों में अरक सहज उपलब्ध नहीं है, भक्त महिलाओं ने

उसका विकल्प ढूंढ लिया है_ वे धातु निर्मित घंटी (पात्र) में नारियल का दूध

डालती हैं अथवा तांबे के बर्तन में कुछ बूंद दूध डाल लेती हैं। बहरहाल, पुरुष

इतने संयमी नहीं। तंत्र का विधान पांच प्यालों का है। प्याला इस प्रकार का होता

है कि उसमें पांच तोला या दो औंस आती है अर्थात वे एक दिन में दस औंस

अरक ले सकते हैं।’’

तांत्रिक पूजा बंगाल के एक छोटे से अंचल तक सीमित नहीं है जैसा कि महामहोपाध्याय जादवेश्वर तारकरत्न ख्1, ने कहा हैः

‘‘जैसे कि बंगालियों की उच्चजातियां शाक्त, वैष्णव और शैवों में विभाजित हैं,

यही बात एक प्रकार से कामरूप, मिथिला, उत्कल अथवा कलिंग और कश्मीरी

पंडितों के साथ है। शक्ति मंत्र, शिवमंत्र, तथा विष्णु मंत्र प्रत्येक तांत्रिक हैं। दक्षिण्

ात्यों में महामहोपाध्याय सुब्रहमण्यम शास्त्री और कई अन्य शाक्त हैं। स्वर्गीय

महामहोपाध्याय राम मिश्र शास्त्री भागवताचार्य और कई अन्य वैष्णव थे, और

हैं। महामहोपाध्याय शिवकुमार शास्त्री तथा कई अन्य शैव हैं। वृंदावन में अनेक

शाक्त और साथ ही वैष्णव ब्राह्मण हैं। यद्यपि महाराष्ट्र की कुलीन जातियों तथा

अन्य दक्षिण भारतीय प्रदेशों में शैव और वैष्णव_ शाक्तों की अपेक्षा अधिक हैं।

पाशुपत तथा जंगम पथ के अनुयायी शैव हैं जबकि माधवाचार्य और रामानुजाचार्य

के वैष्णव उत्तर-पश्चिम में राम मंत्र में दीक्षित हैं, जो मात्र तंत्र में मिलता है।

इस लेखक के अनुसार पण्डा और श्री पुरुषोत्तम सभी शाक्त हैं और कामाख्या

देवी के सभी पुजारी वैष्णव हैं’।’’

तंत्र और तंत्र-पूजा कब आरम्भ हुई? इसका निश्चित समय बताना तो संभव नहीं है परन्तु इसमें कोई संदेह नहीं कि यह काल मनु के बाद का है। तंत्र विकास का यह पक्ष महान आश्चर्य की बात है। तंत्रों ने न केवल मांस और मदिरा पर मनु द्वारा लगाए गए प्रतिबंध तोड़े अपितु मांस-भक्षण और मदिरापान को आस्था का साधन बना दिया।

आश्चर्यजनक बात यह है कि ब्राह्मणों ने तंत्रों और तंत्र-पूजा को प्रोत्साहित किया। तंत्रों की वेदों में आस्था नहीं है। तांत्रिकों का कथन है कि वेद एक बाजारू औरत

  1. अपने ग्रंथ तंत्र के सिद्धांत भाग- I परिचय पृष्ठ 38 में एवलान द्वारा उद्धृत।