पन्द्रहवीं पहेली: ब्राह्मणों ने अहिंसक देवता के साथ रक्त-पिपासु देवी का विवाह क्यों किया? - Page 138

पन्द्रहवीं पहेली

  1. रुद्र के लिए सभी बलियों के समय इस क्षेत्र-पूजा की जाए।

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  1. (चावल की) पुआल और भूसी, पूंछ और खाल, सर, पैर, (बलि दिए गए

पशु के) अग्नि में डाले जाएं।

  1. समवात्य के अनुसार खाल का कुछ उपयोग किया जाए।
  2. अग्नि के उत्तर में दूर्बा घास पर या कुशा के घेरे में (बलि दिए गए पशु

का) रक्त चढ़ाया जाए। उसके मंत्र का भाव है, फुफकारने वाले, गर्जनवाले,

ढूंढने वाले, जकड़ने वाले सरिसृप जो यहां है, यह तेरे लिए है, इसे ग्रहण

कर’’।

  1. फिर उत्तर की ओर घूमकर, जो सरिसृप के लिए नियत है, कहें- फुफकारने

वाले सरिसृप, यहां जो कुछ है, तेरे लिए है, इसे ग्रहण कर। 29. बलिदाता जानता है कि सभी नाम, सभी आयोजक, सारी उत्तेजना से वह

प्रसन्न होता है।

  1. उन व्यक्तियों की भी वह हानि नहीं करेगा जो पूजा में बैठते हैं। ऐसा समझा

जाता है (श्रुति में)।

  1. वह बलि के भाग में साझीदार नहीं होगा।

  2. वह बलि से संबद्ध कोई पदार्थ गांव में नहीं ले जाएंगे।

  3. वह बलि-स्थान से अपने लोगों को दूर रखेंगे।

  4. पर वे एक निर्दिष्ट अवसर पर वह (बलि के भोजन) से भाग ले लें, वह

सौभाग्यशाली होगा।

  1. कटे हुए वृषभ की बलि से धन, क्षेत्र, शुद्धता, पुत्र, पशु, दीर्घायु, दीप्ति

मिलती है।

  1. बलिदान के पश्चात् वह अन्य पशु न खाए।

  2. उसे ऐसे पशुओं का अभाव नहीं रहेगा।

  3. फिर वह पशु-विहीन नहीं रहेगा-ऐसा जाना जाता है (श्रुति में)।

  4. वह संततीय मंत्र जपता हुआ अपने घर जाए।

  5. यदि उसके पशुओं को व्याधि हो तो वह गोशाला में ही उसी देव के लिए

बलि दे।