परिशिष्ट-1
वेदों की पहेलियां
वेद हिंदुओं के पवित्र ग्रंथ हैं। उनके संबंध में अनेक प्रश्न उठते हैं। उनकी उत्पत्ति कहां से हुई? उनका सृष्टा कौन है? उनकी सार्वभौमिकता क्या है? ये कुछ प्रश्न हैं।
हम पहले प्रश्न से आरम्भ करते हैं। हिंदुओं के अनुसार, वे सनातन हैं जिसका अर्थ है, वे अनादि-अनंत है, जब कि अथर्ववेद से यह कथन मेल नहीं खाता है। फिर इसका कोई औचित्य नहीं। अथर्ववेद कहंता हैः ख्1,
‘‘काल से ऋव्Q ऋचाएं प्रस्फुटित हुईं और यजु काल से उपजा।’’ किन्तु और भी विचार उपलब्ध हैं जो इससे बिलकुल भिन्न हैं।
अथर्ववेद से लेकर यह ध्यान देने योग्य है कि वेद में इस विषय पर दो अन्य प्रसंग हैं। इनमें प्रथम बहुत विवेकपूर्ण नहीं है। वह यह हैः ख्2,
‘‘बता वह स्कंभ कौन है? जो आदि ऋषियों, ऋक, साम, यजु, पृथ्वी और ऋषियों का पालक है ......20। बता वह स्कंभ कौन है जिससे ऋक (ऋचाएं) प्रस्फुटित हुईं, जहां से वे यजुस में समाहित हुए, जिससे साम मंत्र उत्पन्न हुए अथर्वन और आंगिरस की वाणी क्या है?’’
अथर्ववेद में जो दूसरा भाष्य आया है, उसके अनुसार वेद इन्द्र ख्3, से प्रस्फुटित हुए।
ऋग्वेद का भाष्य पुरुष सूक्त में उपलब्ध है। इसके अनुसार एक विराट यज्ञ हुआ जिसमें एक रहस्यमय जीव ‘‘पुरुष’’ की बलि चढ़ाई गई। उस ‘‘पुरुष’’ की बलि से
अथर्ववेद, 19.54.3
म्यूर द्वारा संस्कृत टैक्स्ट में उद्धृत, भाग 3, पृ. 3
वही।
यह सामग्री लेखक की प्रस्तुत अंग्रेजी पुस्तक के अध्याय 2 से 6 के अंतर्गत आ चुकी है। अंग्रेजी में इकसठ टंकित पृष्ठ प्राप्त हुए थे जिनका संशोधन नहीं किया गया था। यह सामग्री टंकित कार्बन कापी का अनुवाद है। - संपादक