परिशिष्ट-1: वेदों की पहेलियां - Page 147

132 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

‘‘हे माधवन किसी पूर्ववर्ती या परवर्ती पुरुष आवा वर्तमान पुरुष में इतना पराक्रम नहीं।’’

‘‘क्योंकि (इन्द्र के) पूर्ववर्ती आराधक हम हो सकते हैं, वे निष्कलंक, अप्राप्य और अनाहूत थे।’’

‘‘हे शक्तिमान देव! इस हेतु लोग तेरे आराधक हैं, जैसे कि पूर्ववर्ती मध्य-युगीन और परवर्ती तेरे मित्र थे और हे परम आहूत, सभी वर्तमान वय वालों की सोच’’

‘‘इन्द्र के लिए हमारे पूर्व पिता सात नवगव ऋषि अपने मंत्रों में भोजन की याचना करते हैं।’’

‘‘हमारे नवीनतम मंत्र से गौरवान्वित हो, क्या आप हमें सम्पदा और संतत सहित भोजन देंगे?’’

ऋग्वेद के गहन अध्ययन से पता चलेगा कि उसके पुराने और नए मंत्रों के बीच अंतर है। उनमें से कुछ निम्न प्रकार हैः

‘‘हमारे नवीनतम मंत्र से गौरवान्वित हो, तुम हमें सम्पदा और संतति सहित भोजन प्रदान करो।’’

‘‘हे अग्नि! तूने देवताओं के मध्य हमारी नवीनतम मंत्र आहुति की घोषणा की थी।’’

‘‘हमारे नवीन मंत्रों से तेरा वेग बढ़ेगा। नगर विध्वंसक, पुरंदर हमें प्राणवान आशीर्वाद दें।’’

‘‘शक्ति पुत्र अग्नि को मैं एक नवीन ऊर्जावान मंत्र अर्पित करता हूं जो भाव-वाणी के माध्यम से अभिव्यक्त किया गया है।’’

‘‘जो नवीन अभिव्यक्ति अभी प्रस्फुटित हुई है, उसके द्वारा मैं शक्तिमान संरक्षक को मानस रचना प्रदान करता हूं।’’

‘‘हमारी सहायता हेतु गर्जन करने वाले पुंगव नया मंत्र तुझे उद्बोधित करे।’’

‘‘मैं पूर्वजों की भांति नवीन मंत्र द्वारा तुझे उत्प्रेरित करना चाहता हूं।’’

‘‘तेरी स्तुति में जो नए मंत्र रचे हैं, उनसे तू संतुष्ट हो।’’

‘‘हे सोभारी, इन युवा शक्तिमान, देदीप्यमान, और बुद्धिमान देवों के लिए नए मंत्रों का उच्चारण कर।’’

‘‘गर्जन करने वाले वृत्रहंता इन्द्र! हम अनेक ने तेरे लिए कई मंत्र रचे हैं, जो सर्वथा नवीन हैं।’’