परिशिष्ट-1: वेदों की पहेलियां - Page 161

146 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

सर्वोच्च सत्ता है।’’

चौथा प्रश्न पुराणों के उस दावे से संबंधित है, जो पुराणों को रचना की दृष्टि से वेदों से उच्च स्थान देता है। वायु पुराण का कथन ख्1, हैः

‘‘सर्वप्रथम सभी शास्त्र, पुराण ब्राह्मण के मुख से प्रस्फुटित हुए। तदुपरान्त उनके मुख से वेद।’’ मत्स्य पुराण वेदों से केवल पूर्ववर्ती होना ही घोषित नहीं करता बल्कि वह उनकी गुणवत्ता, सनातनता और स्वर के साथ पहचान को भी श्रेष्ठ मानता है। पहले केवल वेदों को इन गुणों से सम्पन्न कहा गया था। वह कहता ख्2, हैः

‘‘सर्वप्रथम, अविनाशी पितामह (ब्रह्मा) उत्पन्न हुए, फिर वेद, उसके अंगोपांग तथा उनके पाठ के विभिन्न साधन जन्मे और प्रकट हुए। ब्रह्मा ने जिन शास्त्रों का प्रस्फुटन किया उनमें सहस्त्रों कोटि मंत्रों के विस्तृत आयाम वाले शाश्वत ध्वनि जनित शुद्ध शास्त्र, पुराण प्रथम जो शुरू के जाप से जन्मे, फिर वेदों का उद्गम हुआ। तभी मीमांसा और न्याय और अन्य प्रमाण जन्मे 5. उनसे (ब्रह्मा) जो वेदों के अध्ययन में आस्थावान थे, संतति के इच्छुक थे उनके मानस-पुत्र जन्मे। वे इस कारण मानस-पुत्र कहलाए कि सर्वप्रथम उनके मानस से प्रस्फुटित हुए थे।’’

भागवत पुराण वेदों के समान प्रामाणिकता का दावा करता है-

‘‘ब्रह्मरात्र का निर्णय है कि पुराण भागवत कहलाता है, जो वेदों के समान है।’’

ब्रह्मवैवर्त पुराण ने स्पष्टतः दावा किया है वह वेदों से श्रेष्ठ है। वह कहता हैः

‘‘जिस श्रद्धेय ऋषि के विषय में आपने प्रश्न किया है और जो आपकी इच्छा है, पुराणों का सार अति विख्यात ब्रह्मवैवर्त पुराण है जो समस्त पुराणों और वेदों की त्रुटियों का परिष्कार करता है इस को मैं जानता हूं।’’

इस निरूपण से वेदों के संबंध में अनेक पहेलियां उपजती हैं। यह तीन पहेलियां तो हैं ही कि .... ब्राह्मण इस बात पर क्यों बल देते हैं कि वेदों की सत्ता सनातन है, कि वे अपौरुषेय और बिना किसी देवता के उत्पन्न हुए और वे संशय-रहित हैं। इसके अतिरिक्त, वेदों के विषय में एक और पहेली है कि एक समय वेदों की कोई सत्ता नहीं थी और ना ही वे संशय-रहित थे। ब्राह्मणों को, इस बात की आवश्यकता क्यों अनुभव हुई कि उन्हें संशय-रहित घोषित करें। ब्राह्मणों ने सूत्रों को श्रुति की श्रेणी में क्यों विलग किया? ब्राह्मणों ने वेदों के संशय-रहित होने के सिद्धांत को क्यों किनारे कर दिया और पुराणों को वह स्थान दे डाला?

  1. म्यूर द्वारा संस्कृत टैक्स्ट, खंड 3, पृ. 47 पर उद्धृत।

  2. वही. पृ. 28