परिशिष्ट-3: त्रिमूर्ति की पहेली - Page 185

170 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

  1. अगर ऐसा होता है तो जिस देवता की हम पूजा करते हैं वह हमें उस दहकती

भट्टी से निकाल लेगा और हे राजा वह हमें तेरे हाथों से भी बचा लेगा।

  1. तो हे राजा, यह जान ले, यदि ऐसा होता है तो हम किसी देवता की पूजा

नहीं करेंगे, न ही उस स्वर्णमूर्ति की, जो तूने स्थापित की है।’’

  1. तब नेबूचादनेज्जार आग-बबूला हो गया और उसके चेहरे की रंगत बदल

गई। वह बोला और आदेश दिया कि भट्टी को गर्माएं।

  1. फिर उसने सेना के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति से कहा कि वह शाद्राच,

मेशाच और अबेद-नेगो को बांध कर दहकती भट्टी में डाल दें।

  1. तब उन व्यक्तियों को उनके कोट, उनके जुराबों, उनके टोप और दूसरे कपड़ों

समेत बांध कर दहकती भट्टी में डाल दिया।

  1. क्योंकि राजा के आदेश थे, भट्टी दहक उठी थी। लपटों ने उन लोगों को

जलाकर भस्म कर दिया, जो शाद्राच, मेशाच और अबेद-नेगो लाए थे।

  1. और वे तीनों व्यक्ति शाद्राच, मेशाच और अबेद-नेगा दहकती भट्टी में झोंक

दिए गए।’’

ब्राह्मणों ने पहली त्रिमूर्ति को क्यों तिरोहित कर दिया? इसका कोई संकेत नहीं कि देवों के प्रति आस्था की पूर्व शपथ हेतु उन्हें बाध्य किया गया था। क्या यह लाभ प्राप्ति का सौदा था?

दूसरा प्रश्न यह है कि क्या तीन देवों के भक्तों ने जीओ और जीने दो का मार्ग अपना लिया था? एक सम्प्रदाय दूसरे की पोल खोलने के लिए क्यों उद्यत था? इन सम्प्रदायों के बीच नाम के लिए सैद्धांतिक मतभेद भी नहीं था। उनका धर्मशास्त्र, ब्रह्मांड विज्ञान और दर्शनशास्त्र सभी समान था। इसलिए गुत्थी और जटिल हो जाती है। क्या यह पांथिक संघर्ष राजनीतिक था? क्या ब्राह्मणों ने धर्म को राजनीति बना दिया था? वरना झगड़े का कारण क्या था?