परिशिष्ट-4
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शक्ति मत का सार है- देवी की नैसर्गिक शक्ति के रूप में विशिष्ट पूजा, जो एक जगतजननी, जगदंबा है, एक शक्तिशाली रहस्यमय तत्व है। जो दो विशिष्ट कार्यों का संचालन और नियंत्रण करती है। पहला है प्राकृतिक भुभुक्षा और आवेग पर, चाहे शारीरिक संवर्धन के लिए खान-पान अथवा कामवासना अर्थात् साहचर्य से जीव-वृद्धि। दूसरा, सिद्धि, चाहे किसी के व्यक्तिगत उत्कर्ष हेतु हो अथवा शत्रु विनाश के लिए।
यहां यह समझना आवश्यक है कि हिंदुओं के शाक्त मत में इतने व्यापक पौराणिक चरित्र हैं, इनमें अनेक नारी देवियां हैं, जिनका हिंदू देवकुल में विशिष्ट स्थान है।
इसके बावजूद, तांत्रिक नारी देवकुल की व्यूह-रचना फैलती गई। इसके अनेक रूप-स्वरूप बने। शक्ति मत का उद्गम शिवभार्या है। इस बात पर सभी सहमत हैं कि वही सम्पूर्ण नारी पौराणिक प्रथा का उद्गम है। इस परम्परा में उनका सर्वोच्च स्थान है और यह भी उल्लेखनीय है कि उनमें पुरुष देवता शिव के लक्षण विद्यमान हैं। उनका सामान्य दाम्पत्य संबंध ही नहीं हैं अपितु उनके गुणों का भी संचरण हो गया है। हम पहले ही उल्लेख कर चुके हैं कि किस प्रकार देवगण शिव के प्रभामण्डल के चारों ओर एकत्र हो गए। सभी देवों के गुण और कर्म उनमें समा गए और वे स्वयं अपने उपासकों के लिए देवाधिदेव महादेव बन गए। इसी प्रकार, बल्कि इससे भी बढ़कर उनकी भार्या शक्ति-पूजा परम्परा की महादेवी बन गई जिसमें ब्रह्मा, विष्णु और शिव की नारी अभिव्यक्ति होती है और वह उनके कार्यों को स्वयं सम्पन्न करती है। इसी कारण ब्रह्मा और विष्णु की पत्नियां भी उनकी पुत्री मानी जाती हैं क्योंकि उनके गुण-कर्म विपरीत और प्रतिफूल हैं। इसलिए इनसे हिंदू विचारधारा के सम्मुख कोई कठिनाई नहीं आती। वह हर प्रकार अपने पति का दूसरा रूप हैं बल्कि एक ऐसा स्वरूप जिसमें और भी रंग भर दिए गए हैं। क्योंकि एक समय शिव भी वर्ण और प्रकृति से श्वेत-शुक्ल थे और एक समय श्याम। इस प्रकार उनके श्वेत गुण भी अर्ध श्वेत (जब उनका नाम गौरी है) और अर्ध श्याम (जब उनका नाम काली है)।
फिर इन विपरीत लक्षणों में विभिन्न संशोधन हुए और इनमें अनवरत रूप से वृद्धि होती गई। गौरवर्ण और शांत स्वभाव वाली देवियां उमा, गौरी, लक्ष्मी, सरस्वती आदि कहलाईं और जिस प्रकार शिव के 1008 नाम अथवा विशेषण हैं, उसी प्रकार उनकी भार्या के भी। उन सबसे संबंध जुड़ा हुआ है। उनकी न्यूनतम एक सहस्र नाम से प्रार्थना की जाती है। कुछ उनकी सौम्य मूर्ति के नाम से हैं और कुछ विकराल के। उल्लेखनीय हैं कि तंत्रों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति ‘‘म’’ अक्षर से आरम्भ होने वाले उनके आठ नामों का जाप करता है तो राजा स्वयं उसका सेवक बन जाएगा, सभी उसे प्रेम करेंगे और उनके सभी दुख-संताप दूर हो जाएंगे।