सोलहवीं पहेली
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भावी है) वह अमरता का स्वामी है, भोजन से उसका विस्तार होता है। 3. उसकी महानता ऐसी है और पुरुष सर्वश्रेष्ठ है। सारी सृष्टि उसका क्षेत्र है और उसका तीन चौथाई अविनाशी अंश अंतरिक्ष में है। 4. पुरुष का तीन चौथाई अंश उर्ध्व है, उसका एक चौथाई अंश यहां पुनः विद्यमान है, फिर उसका सर्वत्र विलय हो गया। उन सभी पदार्थों में जो भक्षण करते हैं और भक्षण नहीं करते। 5. उससे विराज उत्पन्न हुआ और विराज से पुरुष। जन्म लेते ही वह धरती से आगे बढ़ गया, आगे भी और पीछे भी। 6. जब देवी ने पुरुष की आहुति से यज्ञ किया, वसंत उसका घी था, ग्रीष्म लकड़ी और शरद समिधा। 7. यह बलि पुरुष जो सर्वप्रथम जन्मा, उन्होंने बलि घास पर जला दिया। उसके साथ देवताओं, साध्यों और ऋषियों ने आहुति दी। 8. इस ब्रह्मांड यज्ञ से दही और मक्खन उपलब्ध हुए। इससे वे नभचर और थलचर बने जो वन्य और पालतू हैं। 9. ब्रह्मांड यज्ञ से ऋग्वेद और सामवेद की ऋचाएं निकलीं, छंद और यजुस निकले। 10. उससे अश्व जन्मे और दोनों जबड़ों वाले सभी पशु जन्मे, मवेशी जन्मे और उसी से अजा मेष जन्मे। 11. जब (देवों के) पुरुष को कितने भागों में काटकर विभाजित कर दिया। उसका मुख क्या था? उसकी कितनी भुजाएं थीं? (कौन से दो तत्व) उसकी जंघाएं और चरण बताई गई हैं। 12. ब्राह्मण उसका मुख था, राजन्य उसकी भुजाएं बनीं, जो वैश्य (बना) वह उसकी जंघाएं थीं, शूद्र उसके पैरों से उत्पन्न हुए। 13. उसकी आत्मा (मानस) से चन्द्रमा, उसके चक्षु से सूर्य, उसके मुख से इन्द्र और अग्नि, उसके श्वास से वायु बनी। 14. उसकी नाभि से मारुत बना, उसके शीर्ष से आकाश बना, उसके चरणों से धरती उसके कर्ण से दिशाएं और इस प्रकार विश्व बना। 15. जब देवता यज्ञ कर रहे थे, उन्होंने पुरुष को एक बलि-जीव के रूप में बांधा। इसके लिए सात छडि़यों की, सात टुकड़ों की समिधा चढ़ाई गई। 16. इस यज्ञ में देवताओं ने आहुति दी। ये प्रथम अनुष्ठान थे। इन शक्तियों ने आकाश से कहा पूर्व साध्य, देवतागण कहां हैं।य्
इस मंत्र वृंद का सर्वविदित नाम फ्पुरुष सूक्तय् है और यह जाति और वर्ण-व्यवस्था का शास्त्रीय सिद्धांत माना जाता है।
अन्य वेदों में इस सिद्धांत की कहां तक पुष्टि की गई है?
सामवेद के मंत्रों में पुरुष सूक्त सम्मिलित नहीं किया गया, न इसमें वर्ण-व्यवस्था की कोई अन्य व्याख्या की है।
यजुर्वेद की दो शाखाएं हैं, ‘श्वेत’ और ‘कृष्ण’।
कृष्ण यजुर्वेद में तीन संहिताएं और मंत्रों का समूह है। ये हैं कठ संहिता, मैत्रायणी संहिता और तैत्तिरीय संहिता।
श्वेत यजुर्वेद में मात्र एक संहिता है - वाजसनेयी संहिता।