सोलहवीं पहेली: चातुर्वर्ण्य - क्या ब्राह्मण अपनी उत्पत्ति से परिचित हैं? - Page 203

188 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

III

अगली बात यह देखनी है कि वर्ण-व्यवस्था के संबंध में स्मृतियों की क्या व्याख्या है। उसका ज्ञान आवश्यक है। मनु ने इस संबंध में कहा है ख्1,

फ्उस (स्वयंभू) ने इच्छा करके और अपनी देह से विभिन्न जीवों की रचना के मनोरथ से पहले सागर की सृष्टि की और उसमें एक बीज छोड़ दिया। 9. यह बीज एक स्वर्णिम अंडज बन गया। सूर्य के आकार का_ उससे वह स्वयं ब्रह्मा बनकर उत्पन्न हुए, सारे संसार का जनक। 10. जलधि नाराः कहलाया क्योंकि वह नर से उत्पन्न हुआ था और क्योंकि यह उनकी प्रथम क्रिया थी, इसलिए वे नारायण जाने जाते हैं। 11. वे अजर अगोचर, विद्यमान और अविद्यमान कर्ता पुरुष से उत्पन्न हुए, इसलिए जगत में ब्रह्मा कहलाए। 12. एक वर्ष तक अंडज में रहकर महिमामय पुरुष अपनी ध्यानावस्था से युग्म बन गए।य्

फ्कि विश्व में प्राण प्रतिष्ठा हो, उन्होंने ब्राह्मण, क्षत्रि, वैश्य और शूद्रों की रचना की जो उनके मुख, भुजाओं, जंघाओं और चरणों से उत्पन्न हुए। 32. अपनी देह को दो भागों में विभक्त कर परमात्मा (ब्रह्मा) एक अंग पुरुष और दूसरा अंग नारी बन गया उसमें उन्होंने विराज की सृष्टि की। 33. हे श्रेष्ठ द्विजो, जानो कि मैं ही वह पुरुष विराज स्वयं समस्त संसार का रचयिता हूं। 34. प्राणियों की उत्पत्ति हेतु मैंने कठोर उपासना की और सर्वप्रथम दस महर्षि, महान ऋषि, जीवों के स्वामी बनाए। 35. यथा मरीचि, अत्रि, आंगिरस, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, प्रचेतस, वशिष्ठ, भृगु और नारद की रचना की। 36. उन्हें महान शक्ति प्रदान की, सात अन्य मनु, देवता और देवियां और अपार शक्तिमान महर्षि उत्पन्न किए। 37. यक्ष, राक्षस, पिशाच, गंधर्व, अप्सरा, असुर, नाग, सरिसृप, विशाल पक्षी, और भिन्न-भिन्न पितर, 38. बिजली, गगन गर्जन, मेघ, शकुन अपशकुनकारी ध्वनियां, धूम्रकेतु और विभिन्न-विभिन्न तारागण, 39. किन्नर, कपि, मीन, विविध पक्षी, पशु, मृग, मानव, वन्य पशु और दो जबड़ों वाले पशु। 40. विशाल और लघु आकार के रेंगने वाले जीव मुख, जुएं, मक्खियां, पिस्सू, डांस, वन मक्खी, और विविध अचर पदार्थ 41. इस प्रकार अपने प्रयत्नों और अपने तपोबल से प्रत्येक जीव के पूर्व कर्मों के अनुसार समस्त चर-अचर जगत का सृजन किया।य्

मनु ने अपनी ‘स्मृति’ में उन आधारभूत कारणों के विषय में एक अन्य मत प्रकट किया है, जिनके परिणामस्वरूप मनुष्यों को चार श्रेणियों ख्2, में विभाजित किया गया हैः

  1. म्यूर, संस्कृत टैक्स्ट, खण्ड 1, पृ. 36-37

  2. वही, पृष्ठ. 41