सोलहवीं पहेली: चातुर्वर्ण्य - क्या ब्राह्मण अपनी उत्पत्ति से परिचित हैं? - Page 205

190 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अब महाभारत चार स्थानों पर चार भिन्न-भिन्न व्याख्याएं देता है। प्रथम इस प्रकार हैः

फ्महान् ऋषियों की भांति भव्यता से जन्मे प्रचेता के दस पुत्र गुणवान और पवित्र प्रतिष्ठित हुए और उनसे पूर्ण गौरवशाली प्राणी उनके मुख से प्रज्ज्वलित होने वाली अग्नि से स्वाहा हो गए। उनसे दक्ष प्रचेतस जन्मे और विश्व के जनक दक्ष से ये जगत। विरनी के सहवास से मुनि दक्ष को अपने समान एक सहस्र पुत्र पुत्र प्राप्त हुए जिन्हें नारद ने मोक्ष का मार्ग बताया और सांख्य का अनुपम ज्ञान दिया। संतति वृद्धि के मनोरथ से दक्ष प्रजापति ने पचास पुत्रियां उत्पन्न कीं। उनमें से दस धर्म को दे दीं। तेरह कश्यप को, सत्ताइस काल नियंता इन्दु (सोम) को ...... अपनी तेरह में से सर्वश्रेष्ठ पत्नी दक्षयानि से मारीचि पुत्र कश्यप को इन्द्र के पश्चात् अपनी शक्ति में अद्वितीय आदित्य तथा वैवस्वत प्राप्त हुए। वैवस्वत से शक्तिमान पुत्र यम वैवस्वत उत्पन्न हुआ। मार्तण्ड, (सूर्य, वैवस्वत) को बुद्धिमान और वीरपुत्र मनु उत्पन्न हुए और प्रसिद्ध यम उसका (मनु) अनुज प्राप्त हुआ। बुद्धिमान मनु धार्मिक था जिसने एक प्रजाति चलाई। इस प्रकार उससे जन्मे (परिवार) मनुष्य, मानव जाति कहलाई। हे राजन! उससे ब्राह्मण क्षत्रियों के साथ उत्पन्न हुए।य्

यहां प्रतिपादित सिद्धांत ठीक वैसा ही है जैसा कि रामायण में। भिन्नता मात्र इतनी है कि महाभारत में मनु को चार वर्णों का प्रणेता कहा गया है और दूसरे, इसमें यह नहीं कहा गया है कि चार वर्ण, मनु के चार अंगों से उत्पन्न हुए।

महाभारत की दूसरी व्याख्या ख्1, ऋग्वेद के पुरुष सूक्त के समान है। वह इस प्रकार हैः

फ्राजा ऐसे व्यक्ति को अपना राज पुरोहित नियत करे जो दुष्टता का प्रतिरोधी हो। इस विषय में वे यह प्राचीन कथा सुनाते हैं, जिसमें इला पुत्र मातृस्वन (वायु) और पुरुरवा का संवाद सन्निहित है। पुरुरवा ने कहाः फ्तुम मुझे बताओ कि कब ब्राह्मण, कब अन्य तीन जातियां उत्पन्न हुईं और कब श्रेष्ठता (प्रथम की) स्थापित हुई? मातृस्वन ने उत्तर दिया-य् ब्राह्मण का जन्म ब्रह्मा के मुख से हुआ, उसकी भुजाओं से क्षत्रिय, उसकी जंघाओं से वैश्य जबकि इन तीन वर्णों की सेवा हेतु उसके चरणों से चतुर्थ वर्ण शूद्र उत्पन्न हुआ। जन्मते ही ब्राह्मण धर्मतत्व की रक्षार्थ धरती पर भूतजात का स्वामी बन गया। फिर सृष्टा ने पृथ्वी का शासक क्षत्रिय उत्पन्न किया। प्रजा की संतुष्टि को दण्ड धारण हेतु द्वितीय यम उत्पन्न किया और ब्रह्मा का यह आदेश था। इन तीन वर्णों को वैश्य धन-धान्य उपलब्ध कराए और शूद्र सेवा करें।य् जब इला पुत्र ने पूछाः ‘‘वायु! मुझे बताओ, अपनी धन-सम्पदा सहित यह पृथ्वी किस के अधिकार

  1. म्यूर, संस्कृत टैक्स्ट, खण्ड 1