सोलहवीं पहेली: चातुर्वर्ण्य - क्या ब्राह्मण अपनी उत्पत्ति से परिचित हैं? - Page 210

सोलहवीं पहेली

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ने जल पर उतराते अण्डज को जीवरूप प्रदान किया। फिर पुरुष ने उसका विखण्डन कर उससे एक सहस्र जंघाएं, चरण, भुजाएं, चक्षु, मुख और शीर्ष प्रकट किए। विश्व व्यवस्थापक ने अपने सहयोगी ऋषियों के साथ विश्व की रचना की। उन्होंने अपनी कटि से सात अधो भुवन रचे और ऊर्ध्व मूल से और सात उर्ध्व भुवनों की रचना की। ब्राह्मण पुरुष का मुख था, क्षत्रिय उसकी भुजाएं, वैश्य उसकी जंघाओं से उपजे और शूद्र उस देव पुरुष के चरणों से जन्मे। पृथ्वी उनके पैरों से बनी, वायु उनकी नाभि से। उनके हृदय से स्वर्ग और उनके वक्ष से महालोक बने।’’

अब अंत में वायु पुराण देखें। यह क्या कहता है? इसके अनसुर मनु ने वर्ण-व्यवस्था रची।

गृत्समद का पुत्र शुनक था। उससे शौनक जन्मा। उसी के परिवार में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र उत्पन्न हुए द्विज मानव विभिन्न कर्मों के साथ जन्मे।

VI

कैसी अव्यवस्था है? ब्राह्मण चार वर्णों की उत्पत्ति के विषय में एकरूपता और ठोस प्रमाण क्यों नहीं प्रस्तुत करते?

वर्णों की सृष्टि के विषय में एकमत नहीं है। ऋग्वेद का कथन है कि चार वर्ण प्रजापति ने बनाए। वह यह नहीं बताता कि कौन से प्रजापति ने। हम यह जानना चाहते हैं कि किस प्रजापति ने वर्ण बनाए क्योंकि प्रजापति अनेक हैं। यह मान भी लें कि प्रजापति ने बनाए तो भी सहमति नहीं है। एक का कहना है कि ब्रह्मा ने बनाए, दूसरे का मत है कश्यप ने। तीसरे का विचार है मनु ने बनाए।

इस प्रश्न पर कि सृ ष्टा ने - जो भी वह रहा हो, कितने वर्ण बनाए, जिनमें समानता नहीं। ऋग्वेद के अनुसार वर्ण चार थे। परन्तु अन्य अधिकारी विद्वान कहते हैं केवल दो वर्ण बनाए गए। कुछ का विचार है ब्राह्मण और क्षत्रिय और कुछ मानते हैं ब्राह्मण और शूद्र।

संबंधों के विषय में, सृष्टा के मनोरथ के प्रश्न पर ऋग्वेद चारों वर्णों में एक के बाद एक असमानतों का नियम निर्धारित किया है जो वर्ण विशेष के उद्गम अंग के महत्व के अनुसार श्रेष्ठ या हीन है। जबकि श्वेत यजुर्वेद, ऋग्वेद के सिद्धांत से सहमत नहीं। ऐसे ही उपनिषद, रामायण, महाभारत और पुराण भी कहते हैं, किन्तु हरिवंश पुराण विस्तार से बताता है कि शूद्र द्विज हैं।

ऐसा लगता है कि इस कुटिलता का कारण चातुर्वर्ण्य की कहानी को सनातन रूप देना है जिसे ब्राह्मणों ने स्थापित परम्पराओं के विपरीत ऋग्वेद से जोड़ दिया।

उद्देश्य क्या था? ब्राह्मणों का इस सिद्धांत रचना के पीछे क्या प्रयोजन था?