अठारहवीं पहेली
मनु का पागलपन या मिश्रित जातियों की
उत्पत्ति की ब्राह्मणवादी व्यवस्था
किसी विचारगोष्ठी के लिए यदि कोई मनुस्मृति का अध्ययन करेगा तो वह पाएगा कि उसने जातियों की कई श्रेणियां की हैं। उनके नाम हैंः 1. आर्य जातियां, 2. अनार्य जातियां, 3. व्रात्य जातियां, 4. पतित जातियां और 5. संकर जातियां।
आर्य जातियों का अर्थ है चार वर्णः ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र। दूसरे शब्दों में मनु चार वर्णों को आर्यवाद का सार मानते हैं। अनार्य का अर्थ है वे जातियां जो चातुर्वर्ण्य को स्वीकार नहीं करती हैं जिन्हें वह दस्यु कहता है अथात् जिन्हें वह अनार्य ख्1, जाति मानता है। व्रात्य जातियां वे हैं, जो कभी वर्णों को मानती थीं परन्तु बाद में जिन्होंने इसके विरुद्ध विद्रोह कर दिया।
मनु द्वारा वर्णित व्रात्य जातियां निम्न प्रकार हैंः
व्रात्य ब्राह्मण व्रात्य क्षत्रिय व्रात्य वैश्य
भृग्ग कंटक 1. झल्ल 1. सुधन्वन
अवन्त्य 2. मल्ल 2. आचार्य
वाताधान 3. लच्छवी 3. करुष
पुष्पदा 4. नट 4. विजनमान
सैख 5. करण 5. मैत्र
खस 6. सत्वत
द्रविड़
मनु 10.45। यह श्लोक दो कारणों से अत्यंत महत्वपूर्ण है। एक तो यह कि इसमें शूद्रों को दस्यु से भिन्न बताया गया है। दूसरे, इससे पता चलता है कि शूद्र आर्य हैं।
यह 20 पृष्ठ की पाण्डुलिपि है, जिसका शीर्षक है - ‘ओरीजिन आफ मिक्स्ड कास्ट्स’ हालांकि मूल टाइप की पाण्डुलिपि में लेखक ने हाथ से लिखकर कुछ पृष्ठ जोड़े हैं। पाठ में लेखक ने संशोधन भी किए हैं। - संपादक