पहली पहेली: यह जानने में कठिनता कि कोई हिंदू क्यों है? - Page 23

8 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

पूजा करेंगे। एक हिंदू शिवरात्रि का व्रत रखेगा, जो शिव के लिए परम पावन है। वह एकादशी के दिन व्रत रखेगा जो विष्णु के लिए पवित्र है। वह शिव की प्रसन्नता के लिए बेल वृक्ष रोपेगा और विष्णु की अर्चना में तुलसी।

बहुदेववादी पूजा-अर्चना के विषय में केवल हिंदू देवी-देवताओं तक ही आस्थावान नहीं हैं। हिंदू को मुस्लिम पीर अथवा ईसाई प्रभु की पूजा से भी कोई संकोच नहीं। हजारों हिंदू मुसलमान पीरों के मजार पर चादर चढ़ाते हैं। दरअसल कुछ स्थानों पर मुसलमान पीरों के पुजारी वंशानुगत रूप से ब्राह्मण हैं और वे मुसलमान पीरों जैसी अलफी पहनते हैं। हजारों हिंदू बंबई के पास ईसाई देवी मांट मौली की पूजा करते हैं।

मुस्लिम और ईसाई देवताओं का सिजदा तो केवल विशेष अवसरों पर ही किया जाता है, बल्कि उनमें कुछ सत्त आस्थाएं भी हैं। अनेक ऐसे हिंदू नामधारी व्यक्ति हैं जिनकी इस्लाम में आस्था है। इनमें से अनेक ऐसे लोग मिलेंगे जो विचित्र पंचप्रिय पंथ के अनुयायी हैं। वे पांच मुस्लिम पीरों के मुरीद हैं, जो स्वयं गुमनाम हैं। उन पर मुर्गे चढ़ाते हैं। उनका प्रयोजन वैसा ही लगता है जैसा मुस्लिम फकीर दफाली का था। पूरे भारत में ऐसे हिंदुओं का अभाव नहीं जो मुसलमानों के मजारों, दरगाहों की जिआरत करते हैं जैसे पंजाब का सखी सरोवर।

‘‘मलकानों’’ के बारे में ब्लंट ने कहा है कि आगरा और आस-पास के जिलों में, मुख्य रूप से मथुरा, एटा और मैनपुरी जिलों में वे हिंदुओं से मुसलमान बने हैं। वे राजपूतों, जाटों और बनियों के वंशज हैं। वे आमतौर से अपने को मुसलमान नहीं गिनते, बल्कि अपनी मूल जाति गिनाते हैं। कभी-कभी स्वयं को मलकान कहते हैं। उनके नाम हिंदुओं जैसे हैं और वे मंदिरों में पूजा करते हैं। वे अभिवादन में ‘‘राम राम’’ करते हैं। उनका शादी-व्यवहार मुख्यतः आपस में ही है। दूसरी तरफ वे मस्जिदों में नमाज अता करते हैं, खतना कराते हैं, मुर्दों को दफनाते हैं और जान-पहचान के मुसलमानों के साथ खाते-पीते हैं।

गुजरात में कई ऐसे सम्प्रदाय हैं - जैसे मटिया कुनबी जो अपने मुख्य अनुष्ठानों में ब्राह्मणों को बुलाते हैं, परन्तु पीराना संत इमाम शाह और उनके उत्तराधिकारियों के मुरीद हैं। शेख लोग अपने यहाँ शादी-विवाह में पंडित और काजी दोनों को बुलाते हैं। मोमन सुन्नत कराते हैं, मुर्दों को दफनाते हैं। और गुजराती में कुरान पढ़ते हैं। लेकिन अन्य कार्यों में उनके रीति-रिवाज हिंदुओं जैसे हैं।

यदि कोई कहता है कि वह इसलिए हिंदू है कि उसे हिंदू धर्म में आस्था है तो उसका उत्तर सही नहीं हो सकता क्योंकि सत्य यह है कि हिंदुओं का कोई निश्चित