अठारहवीं पहेली: मनु का पागलपन या मिश्रित जातियों की उत्पत्ति की ब्राह्मणवादी व्यवस्था - Page 232

अठारहवीं पहेली

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सर्वप्रथम उल्लेख अथर्ववेद में आया है। प्रसिद्ध जरासंध मगध का राजा था, जो पांडवों का समकालीन था।

मनु का कथन है कि निषाद ब्राह्मण पुरुष और शूद्र स्त्री की जारज संतान हैं। इतिहास के साक्ष्य बिल्कुल भिन्न हैं। निषाद एक देशी जनजाति थी, जिनका स्वतंत्र प्रदेश और अपने राजा होते थे। यह एक बहुत प्राचीन जनजाति है। रामायण में गुहा को निषाद राज बताया गया है, जिसकी राजधानी श्रृंगवेरपुर थी। जब राम वनवास को जा रहे थे, तो उसने उनका आतिथ्य किया था।

वैदेहक के विषय में मनु का मत है कि वे वैश्य पुरुष और ब्राह्मण स्त्री की जारज संतान हैं। व्युत्पत्ति शास्त्र के अनुसार वैदेहक ख्1, का अर्थ विदेह देश के निवासी से है। प्राचीन विदेह बिहार के दरभंगा और चम्पारन जनपद में स्थित था। यह देश और इस के निवासियों का इतिहास अत्यन्त प्राचीन है। यजुर्वेद में भी इसका उल्लेख है। राम की पत्नी सीता, जनक की पुत्री थी, जो विदेह के राजा थे। उसकी राजधानी मिथिला थी। ऐसे और भी बहुत से तथ्यों की विवेचना की जा सकती है। ये ही पर्याप्त हैं। इनके आधार पर कहा जा सकता है कि मनु ने इतिहास को भ्रष्ट कर डाला और अत्यंत सम्मानित तथा शक्तिशाली जनजातियों को जारज घोषित कर दिया। बड़े-बड़े समुदायों को थोक के भाव जारज बता डालने वाले मनु ने व्रात्यों को छोड़ दिया। परन्तु परवर्तियों ने वही कार्यक्रम जारी रखा और व्रात्यों को भी जारज कह दिया। मनु के अनुसार कर्ण व्रात्य थे। परन्तु ब्रह्मवैवर्त पुराण ने उन्हें जारज बताया है और कहा है कि वे वैश्य पिता और शूद्र माता की संतान हैं। मनु ने पौंड्रकों को व्रात्य माना है। किन्तु ब्रह्मवैवर्त पुराण में उन्हें वैश्य पिता और चुन्दी माता की संतान बताया है। मल्ल को मनु व्रात्य कहते हैं किन्तु ब्रह्वैवर्त पुराण में वे लेत्त पिता और तीव्र माता से उत्पन्न हुए हैं। वृहज्जकौतुक को मनु व्रात्य ब्राह्मण मानते हैं। परन्तु गौतम संहिता में वे ब्राह्मण पिता और वैश्य मां के पुत्र-पुत्री हैं। मनु ने यवनों को व्रात्य क्षत्रिय घोषित किया है। लेकिन गौतम संहिता में वे क्षत्रिय पिता और शूद्र मां से जन्मे हैं। मनु किरातों को व्रात्य क्षत्रिय कहते हैं। वल्लाल चरित्र में उन्हें वैश्य पिता और ब्राह्मण माता की संतान कहा गया है।

यह स्पष्ट है कि मनु ने जिन जातियों को जारज कहा है, उनमें से कई की उत्पत्ति स्वतंत्र है, फिर भी मनु और अन्य स्मृतिकार उन्हें जारज बताते हैं। उनके प्रति ऐसा पागलपन क्यों? क्या उनके पागलपन की कोई पद्धति है?

  1. विदेह के इतिहास के लिए देखें क्षत्रिय क्लांस इन बुद्धिस्ट इंडिया, भाग 2, अध्याय 1 द्वारा बी.सी. ला