218 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
इन तथ्यों पर विचार करने के पश्चात् यह एक पहेली ही है कि मनु ने संकर जातियों का प्रश्न क्यों खड़ा किया। आखिर इसके पीछे उनका तात्पर्य क्या था?
ऐसा संभव है कि मनु को यह बात समझ में आ गई थी कि चातुर्वर्ण्य-व्यवस्था का ढांचा चरमरा रहा है और उन जातियों की बड़ी उपस्थिति जो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य अथवा शूद्रों की परिधि में नहीं आती थीं, चातुर्वर्ण्य के विफल हो जाने का उत्तम प्रमाण था। इसलिए उन्हें चातुर्वर्ण्य के नियमों को अनदेखा करके चातुर्वर्ण्य से बाहर की जातियों के अस्तित्व के विषय में प्रकाश डालने के लिए विवश होना पड़ा।
पर क्या मनु ने अनुभव किया कि उन्होंने जो व्याख्या की थी, वह कैसी भयानक थी। उनकी व्याख्या के क्या अर्थ निकलते हैं?
उनके कथन से समाज के मानव-चरित्र और विशेषकर स्त्री जाति पर क्या कलंक पुत गया है? यह स्पष्ट है कि पुरुष और नारियों के बीच गुप्त संबंध थे क्योंकि चातुर्वर्ण्य ने प्रतिबंधित कर दिया था। किन्तु ये गुप्त संबंध इक्का-दुक्का रहे होंगे। वे बड़े स्तर पर नहीं हो सकते थे। परन्तु जब तक हम यह नहीं समझ लेते कि बड़े दुराचार इतने व्यापक स्तर पर विद्यमान थे, इस बात का औचित्य नहीं ठहराया जा सकता कि मनु द्वारा वर्णित इतने सारे चाण्डाल और अस्पृश्य समाज में पैदा हो गए हैं।
मनु ने कहा है कि चाण्डाल जाति ब्राह्मण स्त्री और शूद्र पुरुष के बीच अवैध संभोग का परिणाम है। क्या यह सच हो सकता है? इसका अर्थ तो यह हुआ कि ब्राह्मण स्त्रियों का चरित्र बहुत भ्रष्ट रहा होगा। शायद इसका अर्थ शूद्रों ख्1, से संभोग करने को उनके मन में विशेष आकर्षण हो। क्या इस पर विश्वास किया जा सकता है?
चाण्डलों की जनसंख्या इतनी अधिक है कि यदि प्रत्येक ब्राह्मण स्त्री भी एक शूद्र की रखैल रही होगी तो भी समाज में चाण्डाल इतने अधिक पैदा न होते जितनी कि चाण्डालों की जनसंख्या है।
संकर जाति संबंधी इस सिद्धान्त के प्रतिपादन से पहले क्या मनु ने सोचा कि इस देश में इतने अधिक जन-समुदाय को अकुलीन घोषित कर दिया जाए और वे सामाजिक एवं नैतिक दृष्टि से नीच कहलाए जाकर समाज में रहें? उन्होंने क्यों कहा कि जातियां दोगली हैं जबकि वास्तव में इन जातियों का स्वतंत्र अस्तित्व था?
- मेगस्थनीज का कथन है कि ब्राह्मणों को अपनी पत्नियों पर संदेह है इसलिए उन्होंने अपने दार्शनिक सिद्धांत उन्हें नहीं बताए कि कहीं वे इन्हें कुपात्रों को न बता दें।