226 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
गोमेध में गाय की बलि।
श्रौतमणि यज्ञ तक में मद्यपान।
और 12 अग्निहोत्र के पश्चात् बचे हुए प्रसाद को ग्रहण करने हेतु उसमें
प्रयुक्त कलछी को चाटना और बाद में अग्निहोत्र में उस कलछी का प्रयोग
करना।
शास्त्रानुसार आश्रम जीवन यापन में प्रवेश।
(जन्म और मृत्यु होने पर) व्यवहार और वैदिक ज्ञान के आधार पर अशुचिता
की अवधि घटाना।
प्रायश्चित स्वरूप मौत का विधान ब्राह्मणों के लिए।
नैतिक पाप (स्वर्ण) चोरी को छोड़कर और पापियों (महापातकों) के साथ
संपर्क होने पर (गुप्त) प्रायश्चित।
- वर, अतिथि और पितरों को मंत्रों के साथ जानवरों के मांस की भेंट।
- औरस तथा दत्तक पुत्र के अतिरिक्त अन्य को पुत्रों के रूप में स्वीकार
करना।
- उन व्यक्तियों के साथ प्रायश्चित के उपरांत भी संपर्क, जिन्होंने उच्च जाति
की महिला के साथ संभोग किया है।
- यदि किसी वृद्ध अथवा सम्मानित व्यक्ति की पत्नी ने परपुरुष से संभोग
किया है और उसके लिए वह प्रताडि़त की गई है, उसका परित्याग। 21. किसी एक व्यक्ति के लिए दूसरे का वध।
झूठन छोड़ना।
जीवन के लिए (पैसा लेकर) किसी देवता विशेष की मूर्ति की पूजा का
संकल्प।
- मृत्यु के उपरांत अग्निक्रिया के अधीन फूल चुनने के पश्चात् उन व्यक्तियों
का स्पर्श।
ब्राह्मण द्वारा पशु की वास्तविक बलि।
ब्राह्मण द्वारा सोम पादप का विक्रय।
छह बार का भोजन अथवा छ समय तक भूखा रहने के उपरांत भी ब्राह्मण
का शूद्र से भी भोजन ग्रहण करना।