228 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
है कि क्या इन कार्यों को अनैतिक माना गया है, निंदित पापकर्म अथवा समाज में हानिकर? इसका उत्तर है नहीं। प्रश्न यह है कि यदि वर्जित है तो निंदित क्यों नहीं है? यही कलिवर्ज्य संहिता की पहेली है। बिना निंदित बताए प्राचीनकाल के इन व्यवहारों को वर्जित घोषित करने की प्रणाली प्राचीन प्रणाली के विपरीत है। एक उदाहरण लेते हैं। आपस्तम्ब धर्म सूत्र में सम्पूर्ण सम्पत्ति ज्येष्ठ पुत्र को ही दिया जाना वर्जित है। परन्तु वह इसकी निंदा करता है। ब्राह्मणों ने यह प्रणाली क्यों अपनाई कि वर्जित है किन्तु निंदित नहीं। इस परित्याग के पीछे कोई विशेष कारण होना चाहिए। वह कारण क्या है?