परिशिष्ट-I: वर्णाश्रम धर्म की पहेली - Page 250

परिशिष्ट- I

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जंघाओं और चरणों से उत्पन्न हुए। 32. वे ब्रह्मा अपने शरीर के दो भाग करके आधे भाग से पुरुष तथा आधे भाग से स्त्री हो गये और उसी स्त्री में फ्विराटय् पुरुष की सृष्टि की। 33. हे श्रेष्ठ द्विजगणो! उस फ्विराजय् पुरुष ने तपस्या करके स्वयं की सृष्टि की, इस लोक की सृष्टि की।य् 34. प्रजापतियों की सृष्टि करने को इच्छुक मैंने अत्यंत कठिन तपस्या कर पहले इस प्रजापतियों की सृष्टि की। 35. मरीचि, अत्रि, अंगिरस, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, प्रचेता, वसिष्ठ, भृगु और नारद। 36. महातेजस्वी इन दस प्रजापतियों ने सात अन्य मनुओं, ब्रह्मा से पहले नहीं उत्पन्न किये गये देवों, उनके वास्रस्थानों तथा अपरिमित तेजस्वी महर्षियों की सृष्टि की। 37. यज्ञ, राक्षस, पिशाच, गंधर्व, असुर, नाग, सर्प, गरुड़, पितृगण। 38. तथा बिजली, वज्र, बादल, रोहित, इन्द्रधनुष, उल्का, निर्घात, धूमकेतु और अनेक प्रकार के ऊंची-नीची छोटी-बड़ी ताराओं, ध्रुव तथा अगस्त्य आदि। 39. किन्नर, वानर अनेक प्रकार की मछलियां, पक्षी, पशु, मृग, सिंह, व्याघ्र आदि और दोनों ओर दांत वाले पशुओं। 40. कृमि, बहुत छोटे कीड़े, कीट-पतंग, जूं, मक्खी, खटमल, सब प्रकार के दंश तथा मच्छर और अनेक प्रकार के जड़ पदार्थों की सृष्टि की। 41. इस प्रकार इन महात्माओं ने मेरे आदेश से तपोबल द्वारा इन स्थावर तथा जंगम प्राणियों की सृष्टि उनके कर्म के अनुसार की।य्

मनु ने अपनी ‘स्मृति’ में उन आधारभूत कारणों के विषय में एक अन्य मत प्रकट किया है जिनके परिणामस्वरूप मनुष्यों को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया ख्1,

फ्अब मैं संक्षेप में बताता हूं कि किस क्रम से अपने गुणानुसार आत्माएं अपनी स्थिति को पहुंचती हैं। 40. सत्व-सम्पन्न आत्माएं देवता बन जाती हैं, रजोगुण युक्त मनुष्य बनती हैं, जबकि तमोगुण वाली वन्य-जंतु होती हैं-यह तीन गतियां हैं। 43. हाथी, अश्व, शूद्र और प्रताणनीय मलेच्छ, सिंह, बाघ और सूकर की मध्यम अधभार स्थिति... 46. राजा, क्षत्रिय, राज-पुरोहित और वे व्यक्ति, जिनका मुख्य व्यवसाय वाद-प्रतिवाद है, दुर्वासना की मध्य स्थिति... 48. भक्त, तापस, ब्राह्मण, देवतागण विमानारूढ़ होती हैं। तारामंडल दैत्यों में सद्गुण न्यूनतम होते हैं। 49. अग्निहोत्री, ऋषि, देवतागण, वेद, सृष्टा ब्रह्मा, सदाचारी, महंत, अव्यक्तों में सर्वाधिक सदगुण होते हैं। 50. सृष्टा, सदाचारी, महंत और अव्यक्त ब्रह्मा में सर्वोपरि श्रेष्ठता है। इन विचारों की रामायण और महाभारत में व्यक्त विचारों से तुलना की जाए।’’

यह रुचिकर होगा कि हम रामायण और महाभारत से इस मत की तुलना करें। रामायण में कहा गया है कि चारों वर्ण मनु की संतान हैं। वे दक्ष की पुत्री और कश्यप की पत्नी से उत्पन्न हुए हैंः

  1. म्यूर, संस्कृत टैक्स्ट, खंड 1, पृ. 41