236 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
फ्सुनो, मैं तुम्हें बताता हूँ कि आरम्भ में, सर्वप्रथम प्रजापति ने प्रारंभ किया। सर्वप्रथम कर्दम थे, फिर विकृत, शेष, समस्रेय, शक्तिमान, भूपुत्र, स्थनु, मारीचि, अत्रि, प्रबल, क्रतु, पुलस्त्य, अंगिरस, प्रचेता, पुलह, दक्ष, फिर वैवस्वत, आरिष्टनेमी और गौरवशाली कश्यप, जो अंतिम थे। दक्ष प्रजापति की साठ कन्याएं बताई जाती हैं। उनमें से अदिति, दिति, दनु, कालका, ताम्र, क्रोधनासा, मनु और अनाला, इन आठ सुन्दर कन्याओं का विवाह कश्यप से हुआ। प्रसन्न होकर कश्यप ने कहा- फ्तुम मेरे समान पुत्र उत्पन्न करो, तीनों लोक का पोषण करो।’’ अदिति, दिति, दनु और कालका तत्पर हो गईं किन्तु अन्य तैयार न हुईं। अदिति से तैंतीस देवता उत्पन्न हुए, आदित्य, वसु और दो अश्विनी पुत्र। कश्यप भार्या मनु से मनुष्य जन्मे, ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र। ब्राह्मण का जन्म मुख से हुआ, क्षत्रिय का वक्ष से, वैश्य जंघाओं से और शूद्र चरणों से। ऐसा वेद कहते हैं। अनल से शुद्ध फलों वाले वृक्ष उत्पन्न हुए।य्
महाभारत की व्याख्या निम्न प्रकार से है ख्1, ः
फ्महान ऋषियों की भांति भव्यता से जन्मे प्रचेता के दस पुत्र गुणवान और पवित्र प्रतिष्ठित हुए और उनसे पूर्ण गौरवशाली प्राणी उनके मुख से प्रज्ज्वलित होने वाली अग्नि से स्वाहा हो गए। उनसे दक्ष प्रचेतस जन्मे और विश्व के जनक दक्ष से ये जगत। विरनी के सहवास से मुनि दक्ष को अपने समान एक सहस्र पुत्र प्राप्त हुए, जिन्हें नारद ने मोक्ष का मार्ग बताया और सांख्य का अनुपम ज्ञान दिया। संतति वृद्धि के मनोरथ से दक्ष प्रजापति ने पचास पुत्रियां उत्पनन कीं, उनमें से दस धर्म को दे दी, तेरह कश्यप को, सत्ताइस काल नियंता इन्दु (सोम) को.... अपनी तेरह में से सर्वश्रेष्ट पत्नी दक्षयानी से मारिचि पुत्र कश्यप को इन्द्र के पश्चात् अपनी शक्ति में अद्वितीय आदित्य तथा विवस्वत प्राप्त हुए। विवस्वत से शक्तिमान पुत्र यम वैवस्वत उत्पन्न हुआ। मार्तण्ड (विवस्वत, सूर्य) को बुद्धिमान और वीरपुत्र मनु उत्पन्न हुए और प्रसिद्ध यम उसका (मनु) अनुज प्राप्त हुआ। बुद्धिमान मनु धार्मिक था जिसने एक प्रजाति चलाई। इस प्रकार उसके (परिवार) मनुष्य, मानव जाति कहलाई। हे राजन्! उससे ब्राह्मण क्षत्रियों के साथ उत्पन्न हुए।य्
महाभारत की दूसरी व्याख्या ऋग्वेद के पुरुष सूक्त के समान है। वह इस प्रकार हैः
राजा किसी ऐसे व्यक्ति को राज पुरोहित नियुक्त करे। जो उत्तमता का संरक्षक और दुष्टता का प्रतिरोधी हो। इस विषय में वे इस प्राचीन कथा को सुनाते हैं। जिसमें इला पुत्र मातृस्वन (वायु) और पुरुरवा का संवाद सन्निहित है। पुरुरवा ने कहाः फ्तुम मुझे बताओ कि कब ब्राह्मण, कब अन्य तीन जातियां उत्पन्न हुईं और कब श्रेष्ठता
- म्यूर, संस्कृत टैक्स्ट, खंड 1, पृ. 125