परिशिष्ट- I
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ऋक, यजुस, साम और अर्थववेद मानस की आहुति से उत्पन्न हुआ जो यज्ञ पुरुष का रूप है, उसकी ऋषियों ने पूजा की जिन का मनोरथ था कि सुद्युम्न अपना पुरुषत्व पुनः प्राप्त कर ले।
फ्विष्णु पुराण के अनुसार अत्रि ब्रह्मा का पुत्र और सोम (चन्द्रमा) का पिता था, जिसे ब्रह्मा ने पौधों की सम्प्रभुता दी और तारों का स्वामी बनाया। राजसूर्य यज्ञ के पश्चात् सोम मदांध हो गया और देवताओं के गुरु बृहस्पति की पत्नी तारा को ले आया जिसके लिए यद्यपि उसकी भर्त्सना की गई और ब्रह्मा ने, देवताओं और ऋषियों ने बृहस्पत् की पत्नी लौटाने की अनुनय-विनय भी की किन्तु उसने उसे नहीं लौटाया। सोम का पक्ष ऊष्ण गण ने लिया जबकि आंगिरस के शिष्य रुद्र ने बृहस्पति की सहायता की। दोनों ओर से घमासान युद्ध हुआ, जिसमें देवता और दैत्यों ने क्रमशः दोनों पक्षों में युद्ध किया। ब्रह्मा बीच में पड़े और सोम को विवश किया कि वह बृहस्पति को उसकी पत्नी लौटा दें। इस बीच वह गर्भवती हो गई और एक पुत्र बुध को जन्म दिया। बहुत अनुरोध करने पर उसने स्वीकार कर लिया कि सोम ही बुध का पिता है। जैसा कि पहले बताया जा चुका है, पुरुरवा मनु की पुत्री इला और बुध का पुत्र था। पुरुरवा और अप्सरा उर्वशी का प्रेम शतपथ ब्राह्मण 11.15, 1, 1, विष्णु पुराण 4, 6, 19 भागवत पुराण 9, 14, और हरिवंश पुराण अंश 26, महाभारत आदि पर्व भाग 75 में वर्णित है। इसमें पुरुरवा का ब्राह्मणों से संघर्ष दिखाया गया है। उन प्रसंगों का आगे उल्लेख किया जाएगा। विष्णु पुराण 6, 7, 1, के अनुसार पुरुरवा के छह पुत्र थे। उनमें सबसे बड़ा अयुस था। अयुस के पांच पुत्र थेः नहुष, क्षेत्र-वृद्ध, रम्भा, राजी और अनेनस।
फ्क्षेत्रवृद्ध का पुत्र था सुनहोत्र जिसके तीन पुत्र कास, लेस और गृत्समद थे। अंतिम पुत्र से शौनक उत्पन्न हुआ जिसने चार वर्ण बनाए। कास एक पुत्र कासिराज था, उसका भी पुत्र था दीर्घतमस क्योंकि धन्वंतरि दीर्घतमस था।य्
द्वितीय कथन के अनुसार वर्ण-व्यवस्था के जनक ब्रह्मा थे। जैसे कि निम्नांकित उद्धरण विष्णु पुराण में मिलते हैंः
फ्मैत्रेय कहते हैंः तुमने मुझे अर्वस्रोत अथवा मानवसृष्टि के संबंध में बताया। अब हे ब्राह्मण! मुझे विस्तार से बताओ। ब्रह्मा ने इसकी सृष्टि किस प्रकार की? मुझे बताओ, उसने कैसे और किस गुण से वर्ण बनाए और ब्राह्मण तथा अन्य कार्य कौन-कौन से हैं। पराशर ने उत्तर दियाः 3. अपने विचार के अनुसार ब्रह्मा की कामना जगत सृष्टि की हुई। जिनमें सत्व होता है, वे उनके मुख से उत्पन्न हुए। 4. जिनमें रजोगुण होता है, वे उसके वक्ष से जन्मे_ जिनमें रजोगुण और तमोगुण होता है, वे उनकी जंघाओं से जन्मे। 5. अन्य उनके चरणों से उत्पन्न हुए जिनके