परिशिष्ट-I: वर्णाश्रम धर्म की पहेली - Page 255

240 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

मुख्य लक्ष्ण हैं कलुष। इससे वर्ण-व्यवस्था की चार जातियाँ बनीं- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र, जो क्रमशः मुख, वक्ष, जंथा और चरणों से बने हैं। 6. ब्रह्मा ने यह चातुर्वर्ण्य-व्यवस्था यज्ञ के लिए की थी। देवताओं ने वर्षा कर मानवता पर उपकार किया। यज्ञ से सम्पन्नता आती है। 8. इसे गुणी सदाचारी और दुष्कर्मों से दूर रहने वाले लोग सम्पन्न करते हैं। 9. मानव अपनी नम्रता से स्वर्ग और मोक्ष प्राप्त करता है और वे वांछित लोक को प्रस्थान करते हैं।

फ्गृत्समद का पुत्र शुनक था, उससे शौनक ब्राह्मण, क्षत्रिय और शूद्र उत्पन्न हुए।य्

फ्विताठ पांच पुत्रों के पिता थे। वे थे सुहोत्र, सुहोत्री, गया, गर्ग और कपिल। सुहोत्र के दो पुत्र थे, कासक और राजा गृत्समति। उसके पुत्र ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य थे।य्

दूसरे आख्यान के अनुसार उनकी उत्पत्ति विष्णु से हुई जो ब्रह्मा से प्रकट हुए थे और प्रजापति दक्ष बन गए। यह इस प्रकार है ख्1, -

जनमेजय ख्2, कहता हैः हे ब्राह्मण! मैंने ब्रह्मयुग (वर्णन) सुना है जो आदि युग था। मेरी भी कामना है, क्षत्रिय युग के विषय में सार-गर्भित और विस्तार से अनेक प्रेक्षणों के आधार यज्ञ के सौदाहरण उल्लेख का सम्पूर्ण विवरण दें। वैशम्पायन ने उत्तर दियाः फ्मैं उस युग के विषय में बताता हूं, जिसका यज्ञों के कारण आदर है और जो मुक्ति में अनेक कर्मों की विशिष्टता से सम्पन्न है, जिसका आदर तब के मनुष्यों के कारण किया जाता है। मुक्ति के लिए अबाध कर्म किए जाते थे। ब्रह्मा के प्रति चित्त की एकाग्रता थी और संयम था। ब्राह्मणों के उद्देश्य महानतम थे। ब्राह्मण अपने व्यवहार से गौरवान्वित और मर्यादित थे, संयम का जीवन व्यतीत करते थे। ब्राह्मणों में अनुशासन था, वे अपने कर्त्तव्यपालन में त्रुटिहीन थे। उनका ज्ञान अथाह था। वे मननशील थे। तब सहस्रों युग व्यतीत होने पर ब्राह्मणों की सत्ता शिखर पर थी। तब ये मुनि इस विश्व के विलयन में सम्मिलित हुए। ब्रह्मा से विष्णु प्रकट हुए। वे इन्द्रियज्ञान से परे हो गए। और ध्यानावशिष्ट हो गए, प्रजापति दक्ष बन गए और अनेक प्राणियों की सृष्टि की। ब्राह्मण को रूपराशि (चन्द्रमा को प्रिय) और अक्षय बनाया गया। क्षत्रियों को नश्वर तत्वों से रचा, एकांतरण से वैश्य बने और धूम्र परिष्करण से शूद्रों को बनाया गया। जब विष्णु वर्णों पर विचार कर रहे थे तो ब्राह्मण कौ गौर, लाल, पीत तथा नीले रंग का बनाया गया। इस प्रकार विश्व में मानव वर्णों में विभाजित हो गये। उनकी चार पहचान हुई,

  1. म्यूर, खंड 1, पृ. 152-153

  2. हरिवंश में जनमेजय और वैशंपायन के मध्य वार्तालाप।