परिशिष्ट-I: वर्णाश्रम धर्म की पहेली - Page 262

परिशिष्ट- I

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अध्याय 2.43. मूंज आदि के नहीं मिलने पर कुश, अश्मन्तक और बल्वज की बनी हुई मेखला पारिवारिक रीति के अनुसार गांठें बांधकर धारण करें।

अध्याय 2.44. ब्राह्मण का यज्ञोपवीत कपास का, क्षत्रिय का यज्ञोपवीत सन के बने सूत का और वैश्य का यज्ञोपवीत भेड़ के बाल के बने सूत का ऊपर की ओर से बंटा हुआ तीन लड़ी का होना चाहिए।

अध्याय 2.45. धर्मानुसार ब्राह्मण ब्रह्मचारी को बेल या पलाश का, क्षत्रिय ब्रह्मचारी को बट या खैर का और वैश्य ब्रह्मचारी को पीलू या गूलर का दण्ड धारण करना चाहिए।

अध्याय 2.46. प्रमाणानुसार ब्राह्मण ब्रह्मचारी का दण्ड केश तक, क्षत्रिय ब्रह्मचारी का दण्ड ललाट तक और वैश्य ब्रह्मचारी का दण्ड नाक तक लम्बा होना चाहिए।

अध्याय 2.47. दण्ड सीधे, बिना कटे हुए, देखने में सुन्दर, लोगों में सीधे भय नहीं करने वाले छिलकों के सहित और बिना जले हुए होने चाहिए।

अध्याय 2.48. ईप्सित दण्ड धारण कर, सूर्य उपासना तथा अग्नि की प्रदक्षिणा कर विधिपूर्वक भिक्षा मांगनी चाहिए।

अध्याय 2.49. उपवीत ब्राह्मण ब्रह्मचारी को फ्भक्तय् शब्द का वाक्य के पहले उच्चारण कर, क्षत्रिय ब्रह्मचारी को फ्भक्तय् शब्द का वाक्य के मध्य में उच्चारण कर और वैश्य ब्रह्मचारी को फ्भक्तय् शब्द का वाक्य के अंत में उच्चारण कर भिक्षायाचना करनी चाहिए।

ब्रह्मचारी सभी द्विज होते हैं। उन्हें अपने ऊर्घ्व परिधान में अंतर रखना चाहिए। जनेऊ में अंतर क्यों रखा गया है? वे दंड में अंतर क्यों रखे? भिक्षा मांगने के तरीके में अंतर क्यों रखा गया है? ब्राह्मण ब्रह्मचारी ही यह क्यों कहे- फ्भगवती भिक्षाम देहिय् क्षत्रिय ब्रह्मचारी इतना ही क्यों कहें- फ्भिक्षाम भवती देहिय्? वैश्य क्यों कहे- फ्भिक्षाम् देहि भवती।य्

आश्रम धर्म हिन्दुओं की विशिष्टता है और उन्हें इस पर गर्व है। यह सत्य है कि इसकी तुलना नहीं है। परन्तु यह भी सत्य है कि इसमें कोई गुण नहीं है। अनिवार्य ब्रह्मचर्य बहुत आकर्षक लगता है क्योंकि इसके अनुसार बच्चों के लिए अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था की गई बतायी जाती है। परन्तु वह सबके लिए नहीं थी। शूद्र और स्त्रियों को इससे वंचित रखा गया है। शूद्र और स्त्रियां हिन्दूसमाज का 9/10वां भाग हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए यह स्पष्ट है कि यह योजना बुद्धिमत्ता के स्थान पर धूर्ततापूर्ण है। इसमें बहुसंख्यक समाज के साथ भेदभाव रखा गया है और शिक्षा का प्रावधान कुलीन वर्ग के लिए ही है। अनिवार्य विवाह भी एक मूर्खतापूर्ण