परिशिष्ट-II: अनिवार्य वैवाहिक व्यवस्था - Page 273

258 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

6.89. फ्और वैदिक नियमानुसार और स्मृति के अनुरूप गृहस्थ को श्रेष्ठतम बताया गया है क्योंकि वह अन्य तीनों का सहायक है।य्

6.90. फ्जैसे सभी नदियां वशाल और लघु समुद्र में समा जाती हैं, इसी प्रकार सभी श्रेणियों के व्यक्ति गृहस्थ से संरक्षण पाते हैं।य्

इस कथन को सत्य भी मान लेते हैं तो प्रश्न फिर भी बचता है कि मनु ने वानप्रस्थ और संन्यास के पूर्व विवाह की शर्त क्यों रखी? इसका एक ही उत्तर है कि वे लोगों को संन्यासी बनने से रोकना चाहते थे। मनु को संन्यास और वानप्रस्थ क्यों पसंद थे? इसका उत्तर यह है कि बौद्धधर्म का समर्थन और प्रचार सामान्यतः भिक्षु कहलाने वाले संन्यासियों ने किया था। अविवाहित लोगों के लिए भिक्षु बनना सरल था। मनु इसे रोकना चाहते थे। इसी कारण विवाह अनिवार्य बनाया।

प्रकरण

वानप्रस्थ और संन्यास की तुलनात्मक संहिता

I. आश्रम में प्रवेश करते समय परिवार से संबंध

वानप्रस्थ संन्यासी

6.3. फ्सभी कृषि जन्य भोजन और 6.38. फ्जगत स्रष्टा प्रजापति को

वस्तुओं का परित्याग कर, पत्नी को पावन इष्टि संपन्न करने के पश्चात्

पुत्रों के दायित्व में छोड़कर अथवा जहां सारी सम्पत्ति यज्ञ शुल्क में

साथ ले जाकर वन में प्रयाण करे।य् देगा, पवित्र अग्नि को आत्मसात

कर गृह से प्रयाण करेगा। (तापस

रूप में)।य्

II. आवास संबंधी नियम

वानप्रस्थ संन्यासी

6.4. फ्पवित्र अग्नि और घरेलू (यज्ञ 6.41. फ्पवित्र कमण्डल, दण्ड आदि

कार्यों के लिए आवश्यक सामग्री से युक्त मौन धारण किया हुआ

लेकर ग्राम से वन को प्रयाण करे घर से निकला हुआ और उपस्थित

और वहां इंद्रिय नियंत्रण से रहे।य् इच्छा प्रवर्तक वस्तु में निःस्पृह होकर

संन्यास ग्रहण करे।य्

6.42. फ्वह बिना साथी के मोक्ष 6.43. फ्लौकिक अग्नि से रहित,

प्राप्ति हेतु अकेले ही विचरण करे, गृह से रहित, शरीर में रोगादि होने

पूर्णतः समझते हुए कि एकाकी पर भी चिकित्सा आदि का प्रबंध न