इक्कीसवीं पहेली: मन्वतर का सिद्धांत - Page 283

268 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

जिन्होंने परस्पर विवाह कर लिया (भाई-बहन के विवाह का एक और उदाहरण)। उनके बारह पुत्र उत्पन्न हुए। वे देवता स्वायंभुव मन्वंतर में यम कहलाए।य्

फ्प्रथम मनु स्वायंभुव था फिर स्वारोचिष। उसके उपरांत क्रमशः औतमी, तामस, रैवत, चाक्षुष, जो तिरोहित हो गए। सातवें वर्तमान मन्वंतर के मनु, सूर्य-पुत्र वैवस्वत हैं।य्

विष्णु पुराण कहता है अब मैं स्वारोचिष मनु के पुत्रों, देवताओं और ऋषियों के विषय में बताता हूं। इस काल (द्वितीय मन्वंतर) के देवता थे पारावत और तुषित। उनका इन्द्र था फ्विपश्चितय् उनके सप्तर्षि थे। ऊर्ज, स्तंभ, प्राण, दत्तोली, ऋषभ, निश्चर, और अर्वरीवट। चैत्र और किंपुरुष तथा अन्य मनु के पुत्र थे।

फ्तीसरे मन्वंतर के मनु थे औतमी। उसके समय के इन्द्र थे सुशांति। देवताओं के नाम हैंः स्वधामा, सत्य, शिव, प्रतर्दन और वसुवृति और प्रत्येक पांच वर्ग के बारह देवता थे। उस समय के सप्तर्षि वशिष्ठ के सात पुत्र, सात ऋषिगण थे और अज, परसु, दिव्य तथा अन्य मनु के पुत्र थे।

चौथे मनु तापस के काल में पूजनीय देवता थे सुरूप, हरि, सत्य और सुधि। प्रत्येक वर्ग में सत्ताईस देवता थे। शिवी उस काल का इन्द्र था। सौ यज्ञ संपन्न करने के कारण उसे शतक्रतु भी कहा जाता है। सप्तऋषि थे ज्योजिर्धाम, पृथु, कव्य, चैत्र, अग्नि, वानक, और पिवर। तामस के बलशाली पुत्र थे। राजा नर, ख्याति, सांथ्य, जनुजंघा आदि।

पांचवें मन्वंतर के मनु रैवत थे। उनका इन्द्र विभु था। देवतागण, जिनमें प्रत्येक के चौदह देवता होते थे, इस प्रकार थे-अमितभास, अभूतरास, वैकुंठगण, सुमेधगण। तत्कालीन सप्तऋषि थेः हिरण्यरोम, वेदश्री, उर्ध्वबाहु, वेदबाहु, सुद्युम्न, पर्जन्य और महामुनि। रैवत के पुत्र इस प्रकार थे- बाल बंधु, सुसंभाव्य, सत्यक तथा अन्य वीर राजा।

ये चार मनु-स्वारोचिष, औतमी, तामस और रैवत प्रियव्रत की संतान थे जिसने विष्णु को अपनी उपासना से प्रसन्न करके अपनी संतति के लिए मन्वंतरों का मनु बनाए जाने का वर प्राप्त कर लिया था।

छठे मन्वंतर का मनु चाक्षुष था। उसका इन्द्र मनोज्व था। उस काल के पांच वर्ग के देवता थे आद्य, प्रस्तुत, भव्य, पृथुग और उदारता की प्रतिमूर्ति लेखगण। उस काल के सप्तर्षि थे- सुमेध, विराज, हाविष्मत, उत्तम, मधु, अभिनमान और सहिष्णु। पृथ्वी के स्वामी चाक्षुष के शक्तिशाली पुत्र थे उरू, पुरु, शतद्युम्न आदि।