इक्कीसवीं पहेली: मन्वतर का सिद्धांत - Page 285

270 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

होगा। विरोचन का निष्पाप पुत्र विष्णु की कृपा से पाताल का राजा बनेगा। सावर्णी की संतानें होंगी-विराज, अरवरिवास, निर्मोह आदि।

फ्नौवें मनु दक्ष सावर्णी होंगे। उस समय के तीन प्रकार के देव होंगे-घारस, मारीचिगर्भ और सुधर्मा। प्रत्येक वर्ग में बारह देव होंगे और उनका प्रमुख इन्द्र होगा। अद्भुत सवन, द्युतिमत्, भव्य, वसु, मेधातिथी, ज्योतिषान और सत्य, ये सप्तऋषि होंगे, धृतिकेतु, दृप्तिकेतु, पंचहस्त, निर्मय, पृथुसर्व आदि मनु के पुत्र होंगे।

फ्दसवें मन्वंतर में मनु ब्रह्म सावर्णी होंगे_ उनके देवगण होंगे सुधामा, विरुद, शंतसांख्य उनका इन्द्र बलशाली शांति होगा_ सप्तऋषि होंगे-हविष्मान, सुकृति, सत्य_ अप्पममूर्ति, नाभाग, अप्रतिमौज और सत्यकेतु। मनु के दस पुत्र होंगे- सुक्षेत्र, उत्तौज, हरिषेण आदि।य्

फ्ग्यारहवें मन्वतर का मनु धर्मसावर्णी होंगे। उसके समय देव होंगे विहंगम, कामागम और निर्माणरति और प्रत्येक की संख्या तीस होगी। इस मन्वंतर का इन्द्र वृष होगा। सप्तर्षि होंगे निश्चर, अग्नितेज, वपुस्मान, विष्णु, आरुणी, हविष्मान और अनघ। पृथ्वीपालक मनु के पुत्र होंगे सावर्ग, सर्वधर्म, देवानिक और अन्य।य्

फ्बारहवें मन्वंतर में रुद्र-सावर्णी का पुत्र मनु होगा_ उस काल का इन्द्र होगा ऋतुधामा, देवों के नाम होंगे हरित, लोहित, सुमानस और सुकर्मा। प्रत्येक की संख्या पन्द्रह होगी। सप्तर्षि इस प्रकार होंगेः तपस्वी सुतप, तपोमूर्ति, तपोर्ति, तपोधृति, तपोद्युति और तपोधन_ और मनु के मेधावी और बलशाली पुत्र होंगे-देव, उपदेव तथा देवश्रेष्ठ आदि।य्

तेरहवें मन्वंतर का मनु रौच्य होगा। देववर्ग होगा- सुधामन, सुधर्मन, और सुकर्मण, उनका इन्द्र दिवसपति होगा। सप्तर्षि होंगे निर्मोह, तत्वदर्शन, निष्प्रकंप, निरुत्सुक धृतिमत, अव्यय और सुतापस तथा त्रिसेन, विचित्र तथा अन्य नृप होंगे।य्

फ्चौदहवें मन्वतर का मनु भौत्य होगा। शुचि उसका इन्द्र होगा। देवताओं के पांच वर्ग होंगे चाक्षुष, पवित्र, कनिष्ठ, भ्रजीराज, और वैवृद्ध। सप्तर्षि इस प्रकार होंगे। अग्निबाहु, शुचि, शिक्रमागध, ग्रिधृ, युक्त और अजित। मनु के पुत्रों के नाम होंगे उरु, गभीर, गभीरा, बृधन, आदि राजा होंगे और इस धरा के शासक होंगे।य्

इस प्रकार की है मन्वंतरों की कहानी। आजकल हम सर्वहारा वर्ग के अधिनायकवाद की बातें सुनते हैं। ब्राह्मणों का सिद्धान्त इसके ठीक विपरीत है। उनका सिद्धान्त है सर्वहारा पर स्वर्ग में बैठे पिताओं का अधिनायकवाद।

इस प्रकार एक प्रमुख प्रश्न उठता है। एक के पश्चात् एक मनुओं ने किस प्रकार प्रजा पर शासन किया? फ्प्रजा के लिए उन्होंने कौन से विधान बनाए?य् इसका उत्तर