बाइसवीं पहेली: ब्रह्म धर्म नहीं है - ब्रह्मा किस काम का? - Page 287

बाईसवीं पहेली

ब्रह्म धर्म नहीं है, ब्रह्मा किस काम का?

इतिहास में कई प्रकार की सरकारों का वर्णन है, वे हैं- राजतंत्र, कुलीनतंत्र, और प्रजातंत्र। इसमें अधिनायकवाद भी जोड़ा जा सकता है।

इस समय सर्वाधिक सरकारें प्रजातांत्रिक हैं। बहरहाल इस बात पर कोई सहमति नहीं है कि प्रजातंत्र क्या है? इस विषय का निरूपण करने पर हमें इस संबंध में दो विचार मिलते हैं। एक विचार है कि प्रजातंत्र एक प्रकार की सरकार है। इस विचार के अनुसार जब सरकार प्रजा द्वारा चुनी जाती है और जहां प्रतिनिधि सरकार है, वही प्रजातंत्र है। इसके अधीन प्रजातंत्र और प्रतिनिधि सरकार पर्यायवाची है जिसका अर्थ है वयस्क मताधिकार और समय-समय पर चुनाव।

दूसरे मत के अनुसार प्रजातंत्र सरकार की प्रणाली से भी बढ़कर है। यह समाज के संगठन का स्वरूप है। इसके लिए दो आवश्यक स्थितियां हैं जो इस बात का लक्षण है कि समाज प्रजातांत्रिक ढंग से गठित है। पहला यह कि समाज को वर्गों में विभक्त न किया जाए। दूसरा, लोगों और वर्गों की सामाजिक प्रवृति, जो निरन्तर समायोजन और हित सहयोजन को तत्पर हो। जहां तक प्रथम का संबंध है, इसमें कोई संदेह नहीं कि यह प्रजातंत्र का अति आवश्यक अंग है। जैसा कि प्रो. डेवी का मत हैः ख्1,

(लेखक द्वारा निर्दिष्ट उद्धरण मूल पाण्डुलिपि ‘डेमोक्रेसी एंड एजूकेशन’, पृष्ठ 98 में उपलब्ध नहीं है।)

प्रजातांत्रिक ढंग से गठित समाज के लिए दूसरी शर्त भी उतनी ही आवश्यक है। वर्गों और व्यक्तियों के हितों में परस्पर सहयोजन न होने के प्रजातंत्र विरोधी परिणाम होते हैं जिनका प्रो. डेवी ने ख्2, भलीभांति वर्णन किया हैः

  1. डेमोके्रसी एंड एजूकेशन, पृ. 98

  2. वही, पृ. 99

इस अध्याय के मूल 20 पृष्ठ हैं। प्रथम दो और अंतिम छह लेखक के हस्तलिखित हैं। शेष टंकित पृष्ठों पर लेखक के संशोधन हैं। - संपादक