बाईसवीं पहेली
273
प्रजातंत्र के इन दो विचारों में निःसंदेह प्रथम यदि गलत भी नहीं तो अनावश्यक है। उस समय तक प्रजातांत्रिक सरकार नहीं कहला सकती जब तक कि उस समाज जिनके लिए वह कार्यरत है, उसकी रचना पद्धति प्रजातांत्रिक न हो। जो यह सोचते हैं कि प्रजातंत्र का अर्थ मात्र चुनाव कराना है, वे तीन गलतियां करते हैं।
पहली गलती तो यह विचार है कि सरकार और समाज बिलकुल अलग-अलग हैं। दरअसल सरकार समाज से अलग नहीं है। सरकार अनेक ऐसी संस्थाओं में से है जो समाज में जन्म लेती है और सामूहिक सामाजिक जीवन के लिए उसे कुछ आवश्यक काम सौंपे जाते हैं।
दूसरी गलती वे यह करते हैं कि वह यह नहीं समझते कि सरकार किसी समाज के अंतिम लक्ष्य, उद्देश्यों और आकांक्षाओं की प्रतिबिम्ब है और यह तभी संभव है जब समाज, जिसमें कि वह सरकार है, उसकी बुनियाद प्रजातांत्रिक है। अगर समाज की संरचना प्रजातांत्रिक नहीं तो सरकार भी वैसी नहीं हो सकती। जहां समाज शासक और शक्ति वर्ग में बंटा होगा, वहां सरकार, निश्चित रूप से शासक वर्ग की होगी।
उनकी तीसरी गलती यह है कि वे यह भूल जाते हैं कि किसी सरकार का अच्छा या बुरा होना, प्रजातांत्रिक या अप्रजातांत्रिक होना, आमतौर से उसके प्रशासनतंत्र पर निर्भर करता है, विशेष रूप से उसकी प्रशासनिक सेवाओं पर, जिसके ऊपर सर्वत्र सरकार को कानून-व्यवस्था के पालन हेतु निर्भर रहना पड़ता है। यह सब उस सामाजिक वातावरण पर निर्भर है जिसमें प्रशासक पलता है। यदि सामाजिक परिवेश ही अप्रजातांत्रिक है तो सरकार भी अप्रजातांत्रिक ही होगी।
लोग एक और गलती करते हैं जब वे यह समझ बैठते हैं कि प्रजातांत्रिक सरकार चलाने के लिए प्रजातांत्रिक प्रणाली अपना लेना ही काफी है। इस गलती को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि अच्छी सरकार कौन-सी होती है।
अच्छी सरकार का अर्थ है अच्छे कानून और अच्छा प्रशासन। यही अच्छी सरकार का मूलमंत्र है, इसके अतिरिक्त कुछ नहीं। यदि जिनके पास सत्ता है, वे उसका उपयोग समस्त समाज अथवा दलित वर्ग के स्थान पर अपने स्वयं के समाज के हित में करते हैं तो वह अच्छी सरकार नहीं हो सकती।
कोई प्रजातांत्रिक सरकार भली प्रकार चल सकती है या नहीं, यह समाज में सदस्यों पर निर्भर करता है। यदि समाज के लोगों की मानसिकता प्रजातांत्रिक है तो प्रजातांत्रिक सरकार से अच्छे परिणामों की अपेक्षा की जा सकती है। अगर ऐसा नहीं है तो प्रजातांत्रिक सरकार आसानी से एक खतरनाक तरीके की सरकार