तेईसवीं पहेली: कलियुग - ब्राह्मणों ने इसे अनंत क्यों बनाया? - Page 296

तेइसवीं पहेली

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हैं क्योंकि तिथियां धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़ी होती हैं। इसलिए पर्व-समापन का सही समय महत्वपूर्ण है। यह कहा जाता था कि पर्व अपने समाप्ति काल के कारण चार भागों में विभाजित हैं, 1. वे या तो सूर्योदय पर समाप्त होते है।, या 2. पहले प्रहर में, 3. अथवा दोपहर बाद, 4. अथवा तीन पहर बाद। पहले को कृत पर्व कहते थे, दूसरे को त्रेता पर्व, तीसरे को द्वापर पर्व और चौथे को कलि पर्व।

उस समय ‘कलि’ और ‘युग’ शब्दों के कुछ भी अर्थ क्यों न रहे हों, परन्तु कलियुग दीर्घकाल से प्रयुक्त शब्द होने के कारण हिन्दुओं की कालगणना मेंइकाई का द्योतक रहा है। हिन्दुओं के अनुसार चार युगों का एक चक्र है, उन्हीं में से कलियुग भी एक है। अन्य युग हैं कृत, त्रेता और द्वापर।

II

वर्तान कलियुग कब आरंभ हुआ? इस प्रश्न के दो विभिन्न उत्तर हैं।

ऐतरेय ब्राह्मण के अनुसार, इसका आरंभ वैवस्वत मनु के पुत्र नाभनिदिष्ट से होता है। पुराणों के अनुसार यह महाभारत युद्ध के पश्चात् कृष्ण के देहांत पर आरंभ हुआ।

समय निर्धारण में पहले डा. श्याम शास्त्री का कथन ख्1, है, कलियुग ईसा से 3,101 वर्ष पूर्व आरम्भ हुआ। दूसरा अनुमान गोपाल अय्यर ने गणना करके बताया है। उनके अनुसार महाभारत युद्ध 14 अक्तूबर, 1194 ई.पू. को आरंभ होकर 31 अक्तूबर को समाप्त हुआ था। उनका कहना है कि कृष्ण का देहांत युद्ध-समाप्ति के 16 वर्ष पश्चात् हुआ। उनका अनुमान इस बात पर आधारित है कि जब परीक्षित का राजतिलक हुआ, तो उसकी आयु सोलह वर्ष की थी और पाण्डवों ने परीक्षित का राजतिलक करते ही महाप्रस्थान किया था। राजतिलक उसी दिन हुआ था जिस दिन कृष्ण का देहांत हुआ था। इससे वह समय 1177 ई.पू. बैठता है, जब से कलियुग आरंभ हुआ।

इस प्रकार कलिनयुग के आरंभ के विषय में हमारे समक्ष दो तिथियां हैं। 3,101 ई.पू. और 1,117 ई.पू.। कलियुग के संबंध में यह प्रथम पहेली है। कलियुग के आरंभ के संबंध में दो भिन्न तिथियां दी गई हैं, जिनमें बहुत बड़ा कालांतर है। एक व्याख्या कहती है कि 3101 ई.पू. कल्प परिवर्तन की तिथि है न कि कलि के आरंभ की और यह नकल करने वाले की गलती है जिसने कल्प को कलि पढ़ लिया और भ्रांति पैदा कर दी। दूसरी व्याख्या डॉ. श्याम शास्त्री ने दी है। उनके अनुसार कलियुग दो हैं। एक, वह जो 3101 ई.पू. में आरंभ हुआ और दूसरा 1260 अथवा 1240 में आरम्भ हुआ। पहला कलियुग 1840 अथवा 1860 वर्ष रहा और समाप्त हो गया।

  1. गवम् अयन।