282 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
III
कलियुग समाप्त कब होगा? इस प्रश्न पर महान भारतीय ज्योतिषाचार्य गर्गाचार्य ने अपने ‘सिद्धांत’ में प्रकाश डाला है जहां वे कहते हैं कि अशोक के चौथे उत्तराधिकारी मौर्य शासक ने निम्न प्रकार से अपने महत्वूपर्ण विचार प्रकट किये ख्1, ः
तब दुष्ट यूनानी योद्धा साकेत, पांचाल और मथुरा को रौंदतें हुए कुसुमध्वज (पटना) पहुंचेंगे। तब पुष्पपुर विजयोपरांत निःसंदेह सभी प्रांतों में अव्यवस्था होगी। अपराजेय यवन मध्यदेश में नहीं रहेंगे। उनके मध्य परस्पर दहशतपूर्ण और भयानक युद्ध होगा। तब यूनानियों के विनाश के पश्चात् युग की समाप्ति पर सात शक्तिशाली राजा अवध पर शासन करेंगे।
महत्वूपर्ण शब्द हैं-फ्यूनानियों के विनाश के पश्चात् युग की समाप्ति परय् इन शब्दों से दो प्रश्न उत्पन्न होते हैं- 1. गर्ग के दिमाग में कौन सा युग था? और 2. भारत में यूनानियों की पराजय कब हुई? इन प्रश्नों के उत्तर में कोई संदेह नहीं है। युग से उनका आशय है कलियुग और यूनानी भारत में 165 ई.पू. में पराजित हुए। यह कोई अटकल बाजी नहीं है। महाभारत के वन पर्व में अध्याय 188 और 190 में स्पष्ट लिखा है ‘कलियुग के अंत में’ बर्बर शक, यवन, बाह्लीक और अन्य जातियां भारतवर्ष को रौंद डालेंगी।
इन दोनों कथनों का यह परिणाम निकलता है कि कलियुग 165 ई.पू. में समाप्त हो गया है। इस निष्कर्ष का बल प्रदन करने के लिए एक तर्क और है। महाभारत के अनुसार कलियुग का समय एक हजार वर्ष था ख्2, यदि हम यह स्वीकार करें कि कलियुग 1171 ई.पू. में आरंभ हो गया था। इसमें से यदि एक हजार वर्ष घटा दें तो कलियुग 171 ई.पू. में होना चाहिए। जो गर्ग द्वारा दिए गए ऐतिहासिक तथ्य से बहुत दूर भी नहीं है। इस बात में कोई संदेह नहीं रहना चाहिए कि प्रमुख ज्योतिषाचार्य ख्3, के विचार से कलियुग 165 ई.पू. में समाप्त नहीं हुआ है। हो जाना चाहिए था। परन्तु स्थिति क्या? वैदिक ब्राह्मणों के अनुसार कलियुग समाप्त नहीं हुआ यह जारी है। यह उस फ्संकल्पय् शब्द से स्पष्ट है, जो किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में प्रत्येक हिन्दू आज भी दुहराते हैं। यह संकल्प इस प्रकार है ख्4, ः
फ्इस शुभ दिन और शुभ मुहुर्त में प्रथम ब्रह्मा के द्वितीय परार्ध में जो श्वेत वाराह कल्प कहलाता है, कलियुग में वैवस्वत मनु के काल में भारत देश के जम्बूद्वीप भरत
सिवीलाइजेशन आफ एंशिएंट इण्डिया नामक अपनी पुस्तक में आर.सी. दास द्वारा उद्धृत।
क्रोनोलाजी ऑफ एंशिएंट इण्डिया, पृ. 117
गर्ग का वक्तव्य महाभारत से लिया गया है जिसमें कलियुग 1000 वर्ष का बताया गया है। इसमें 171 और जोड़ देने पर 1171 बनता है जिसे कलि का आरंभ कहा गया है।
श्याम शास्त्री, द्रप्स, पृ. 84